कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 841, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंवह बच्चा सन्तुष्ट न हुआ, अपनी माताके दुःखमें दौड़ता फिरा वह अपनी माता-परसे गिद्धोंको हटाता फिरता था। अत्यन्त उद्योग तथा परिश्रमसे अपनी माँको उठाया चाहता था पर वह मृत देह कैसे उठे ? यद्यपि उस बच्चाको परिश्रमका फल नहीं मिला तो भी उसके प्रेमकी यह प्रशंसा अवश्य है।
शिक्षण—एम् फ्रेडरिक क्वेरे साहब पशुपालन विधिके वर्णनमें लिखते हैं कि, जार्डन डिस्प्लाटसमें एक हाथी था, वह केवल तीन चार वर्षका था तो उसकी सेवा एक युवकको सौंपी गयी। उस हाथीको ऐसे ऐसे कौतुक सिखाये, जिन्हें कि, देखकर मनुष्यका मन मोहित होता था, वह अपनी सेवा करनेवालेको बहुत चाहता था उसकी आज्ञाको कदापि नहीं टालता था। उसकी अनुपस्थितिमें तथा उसको न देखनेसे बहुत अप्रसन्न रहता था। कोई दूसरा उसकी कितनी ही सेवा क्यों न करे पर तो भी वह उसस प्रसन्न न होत था दूसरोंके हाथसे कठिन-नताके साथ खाता पीता था।
दरजीको दण्ड—डाक्टर गोल्डस्मिथ साहबकी नेचरल हिण्ट्रीमें लिखा है कि, दिल्ली नगरीमें एक हाथी चला जाता था। वह एक दरजीकी दूकानके पास होकर गुजरा। उसने दरजीकी दूकानमें अपनी सूँड डाली। दरजीने उसकी सँडमें सूई चुभो दी। उस समय तो वह हाथी चुपचाप चला गया, उस पथसे पलटा तो सँडमें कीचड़ भर लिया, उस दर्जीकी दूकानपर पहुँच उसके कपड़ोंपर डाल दी, जिससे जो जो अच्छे कपड़े उसकी दूकानपर फँल रहे थे कीचड़से भर गये। उसने इस प्रकार अपने सुई चुभानेका बदला उस दरजीसे ले लिया।
लिपी—इसी किताब में लिखा है कि, एक हाथी सँडकी नोकसे लेखनी पकड़कर बहुत उत्तमतासे लाटिनके अक्षर लिखा करता था। हाथी बहुत बुद्धिमान और सचेत पशु है। जब यह बनमें रहता है तो बड़ा हाथी झुण्डके आगे आगे चलता है। हाथीमें यह बड़ा गुण है कि, वह बस्तीमें रहता है तो सम्भोग नहीं करता, हाथीकी बुद्धिमानीकी अनेकों बातें लिखी हुई हैं।
गेंडा
गेंडा भी एक बड़ी जातिका जानवर है, उसके सूँघने सुननेकी बड़ी तीक्ष्ण शक्ति होती है पर उसकी आँखें छोटी हैं इस कारण वह थोड़ी दूरतक देख सकता है, गेंडा हवस देश तथा भारतवर्षमें होता है। उसमें भी हाथीके ही समान बुद्धि होती है उसका आखेट भी लोग करते हैं।
बेफीगाकी सहायता—गेंडा बनमें चरता फिरता है उसके साथ एक