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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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किसरोट जानका कथन है—कि, मछली पकड़नेवाला पनिहा कुत्ता बहुत प्रेम करनेवाला पशु होता है। जब उनकी माता मर जाती है तो बच्चे, बहुत सुस्त होकर माताको ढूंढते फिरते हैं। यदि बच्चाको कोई कष्ट पड़ता है तो माता उनके चारों ओर फिरा करती है। जबतक कि, वह स्वयम् मारी न जावे या मर न जावे। यदि उनमेंसे एक मर जावे अथवा मारा जावे तो दूसरा उसका साथी छुड़ानेके लिये बहुत उद्योग करता है। स्काटलैण्डके लोग समझते हैं कि, पानीके कुत्तोंका एक बादशाह होता है, वह दूसरोंसे बड़ा होता है, उसके ऊपर काले श्वेत दाग होते हैं। जब वह उनमेंसे मारा जाता है, तो उसी समय कोई न कोई मनुष्य भी मर जाता है। ऐसा अनुमान किया जाता है कि, उनमें जहर मुहरा होता है, वह सिपाहियोंको मरी तथा रोगोंसे बचाता है, मल्लाहोंके आपत्तिसे बचाता है।

स्ववेमेक्सका कुत्ता—दक्षिणीय अमेरिकाकी रहनेवाली एक जाती स्ववेमेक्सका कुत्ता एडनवर्गनामक नगरमें बँधा रहता था, वह छूट कर अपने स्वामीके घर गया। पलंगके निकट खड़ा होकर अत्यन्त प्रेम प्रगट करने लगा। एक समय उसका स्वामी गिर पड़ा तब वह कुत्ता उसकी कुर्सी पकड़कर उठाने लगा। यह कुत्ता बड़ा धोखेबाज था जब वह भोजन करता था तब अपने भोजनको इधर उधर फँला देता था जिसमें चिड़ियों और चूहोंको धोखा दे आप नेत्र मंद दम साधकर सो जाता था। जिस समय कोई पक्षी अथवा चूहा भोजन लेने आता था उसी समय झपटा मारकर उसको पकड़ लेता था। ये कुत्ते गाड़ियोंमें जोते जाते हैं। पक्का पचास सेरका बोझा छः मिनिटके समयमें एक मील तक ले जाना साधारण बात है।

अनुचितकी लज्जा—उक्त पुस्तकका लेखक लिखता है कि, उसके घरमें एक कुत्ता था—वह घरकी रखवाली किया करता। दैवात् उससे एक दिन टट्टीका शीशा टूट गया। स्वामीने उसको शिक्षादी बहुत लज्जित हुआ। फिर जब कोई नौकर उस टट्टीकी ओर इशारा करके उससे कह देता कि, तूने शीशा तोड़ डाला तो वह अत्यन्त लज्जित हो पूँछ लटकाकर शिरको झुका देता था।

बेडका लानेवाला—एक महाशय अपने मित्र सहित कनवाल नदीके किनारे पर चले जाते थे। वहाँ उन्होंने एक वस्तु पाई जिसको कि, अङ्ग्रेजीमें बेड कहते हैं यानी वो समुद्री पत्थरका टुकड़ा होता है। इसमें अनेकों जीव रहते हैं। जब उस साहबने उसको पाया तो अपने मित्रको दिखाकर कहने लगा कि, यदि इसका समूचा वृक्ष मिलता तो बड़ा बहुमूल्य होता। मुझे बड़ी उत्कण्ठा है कि, यदि ऐसा एक मुझको मिले तो अत्यन्त लाभ हो।

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