कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंऊँगा। मैं उत्पन्न होऊँ तब तू मेरी शरीरके अमुक अमुक चिन्ह देखकर जान लेना कि, यह वही संन्यासी है। यह कहकर संन्यासी गड़हेके भीतर समाधि लेनेको बैठ गया, लोगोंने गड़हा बन्द करना चाहा तो संन्यासीका कुत्ता भी गड़हेमें कूद पड़ा, जिसमें वह भी संन्यासीके साथ समाधि ले। संन्यासीने कुत्तेको बहुत रोका पर उसने न माना। उस संन्यासीने कुत्तेसे कहा कि, ये कुत्ता! यदि तू ऐसा करता है तो तू निश्चय मेरा छोटा भाई होगा। मेरे तेरे राज्य विषयके, झगड़े होंगे। मैं तुझको मारूँगा। संन्यासीने आज्ञा दी कि, अब मिट्टी डालो लोगोंने मिट्टी डालकर उस गड़हेको बन्द कर दिया। समय पाकर उस राजाके घर पुत्र उत्पन्न हुआ जो चिन्ह संन्यासीने कहे थे राजाने देख लिये जिससे जान लिया कि, ठीक यह वही संन्यासी है। आगे कुछ दिनोंके पीछे दूसरा पुत्र हुआ, वे दोनों तरुणावस्थाको प्राप्त हुये। छोटे पुत्रने बड़े पुत्र से विद्रोह किया। उस छोटेकी धृष्टतासे रुष्ट होकर बड़ा छोटेको मार आप राज्य करने लगा।
विदुषी कुत्ती—पञ्जाबदेशके फरोजपुर जिलामें बङ्गला नगर है। वहाँ एक मनुष्यके घरमें एक कुतियाने कई बच्चे दिये थे। उसने चूहडीको आज्ञा दी की, उनको कहीं दूर रख आ। भङ्गिनने ऐसा ही किया, वह कुतिया कहीं गई हुई थी वह बच्चोंको उठाकर कहीं रख आई। जब कुत्ती आई तो अपने बच्चोंको न पाकर जान गई कि, भङ्गिनने मेरे साथ यह दुर्व्यवहार किया है। अब तो जब कभी कहीं वह कुतिया भङ्गिनको देखती तो उसके कपड़ोंको फाड़ती और भूंकती काटती। यद्यपि उसने उस भङ्गिनको बच्चे उठाते न देखा था तो भी भविष्यकी बातें बतानेवाली विद्याके कारण उसने जान लिया कि, यही मेरा बैरी है वह मनुष्य जिसने यह कार्य कराया था उसका पुत्र मर गया। रोजगार छूट गया। उसपर बड़ी बड़ी तंगियां आईं।
बुलहाउण्ड—एक जातिका कुत्ता होता है। इसको लोग बड़े चावसे अपने घरमें रखते हैं। इसकी घ्राण शक्ति ऐसी है कि, गंधही से चोर पकड़ लेता है। इसका यह नियम है कि, जब उसके स्वामीके घर चोरी होती है, चोर माल लेकर चले जाते हैं तब प्रातःकाल इसको छोड़ा जाता है, यह वायुको संधता चला जाता है। जिस ओर वह चोर गया हो उसी ओर बराबर चला जाता है, जहाँ कहीं चोर पाता है वहाँही भूंकने लगता है उसको काटता है उसके कपड़े फाड़ता है। उसकी चिल्लाहट सुनकर लोग दौड़ कर चोरको पकड़ थानेमें लेजाते हैं। क्योंकि, लोगोंको भलीप्रकार विदित है कि, यह बुलहाउण्ड चोरके अतिरिक्त और किसी पर ऐसा आक्रमण नहीं करता। चोर पकड़कर स्वामीका माल थानेसे वरामद कर लिया जाता है।