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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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उक्त साहबके साथका कुत्ता सारी बातें सुन रहा था। साहब आगे चल जाता था उसी समय पीछेसे उसके जलमें कूदनेकी आवाज सुन पड़ी। फिर-कर देखा तो जल बडे वेगसे हिल रहा था। तब वे दोनों महाशय देखने लगे कि, यह कुत्ता क्या कर रहा है। पुनः उन्होंने एक क्षणके पीछे देखा तो उस कुत्तेकी पूछ दिखाई दी, कुत्तेने दमलनेके लिये अपना शिर प्रगट किया जल हिला। अन्तमें वह कुत्ता परिश्रमसे थका हुआ हाँफता २ किनारे आया। वैसेही बूझ खाँचकर लाया जैसा कि, उसका स्वामी चाहता था उसको घसीटकर अपने स्वामीके पांव पर धर दिया। एक समय जब वह बाहर आखेटमें था अपने घरसे बहुत दूर था उससे कहा गया कि, अब तुम जाओ तुम्हारे स्वामीकी स्त्री रोगसे अत्यन्त पीड़ित है उसकी हिफाजत करो। वह उसी समय आ पहुँचा स्वामिनीके पलंगके नीचे लेट रहा।

डूबनेसे बचानेवाला—एक बड़ी मनोहर कहानी है कि, एक मनुष्य हाइलैण्ड भ्रमण कर रहा था। उसके पास निउफाउण्डलेण्डका कुत्ता था। वह नहरके ऊँचे किनारे परसे चला जाता था। वह पैर फिसलनेसे नहरमें गिर पड़ा। उसमें पैरनेका बल नहीं रहा। इस कारण शीघ्रही अचेत हो गया। जब उसे कुछ चैतन्य हुआ तो देखा कि, उसको बहुतेरे गँवार घरे हुए हैं वह नदीके दूसरे किनारे पर एक झोपड़ीमें पड़ा हुआ है, गांववाले घेर कर उसकी औषध कर रहे हैं कि, जिसमें उसके प्राण फिर पलट आवें। बात यों है कि, उन देहातियोंमेंसे एक मनुष्य काम करके अपने घरको जा रहा था उसने दूरसे देखा कि, एक बड़ा कुत्ता जलपर तैरता हुआ किसी वस्तुको खाँच रहा है। वह कभी २ डूब भी जाता है जान पड़ता है कि, वह कुत्ता बडी कठिनाईमें है। क्योंकि, वह कार्य बलके बाहर था उससे खाँचा नहीं जाता था। अन्तमें वह बहुत कठिनाईसे खाँचकर एक खाड़ीमें लाया, जहां तक बन पड़ा जलमेंसे खाँच लाया मनुष्योंने देखा कि, वह आदमीकी लाश है कुत्ता अपनी देह झड़ झडाकर अपने स्वामीका मुंह और हाथ चाटने लगा। यह बात देखकर देहातियोंने सहायता दी, वे उस शवको उठा लाये। अनेक युक्तियाँ करने लगे कि, फिर उसमें प्राण आवे, अन्तमें उस मनुष्यमें प्राण आगये। उसके मोढ़े तथा दूसरा गर्दन पर कुत्तेके दांतके दो चिह्न दिखाई देते थे। इससे यह विचार होता था कि, कुत्तेने पहिले मोढ़े को पकड़ा था फिर उसकी बुद्धिने बतला दिया कि, उसकी ग्रीवाका पिछला भाग पकड़ा जिसमें शिर जलके ऊपर रहे पाव मीलतक वह कुत्ता यह कार्य करता

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