भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 874

पूडलडाग—एक प्रकारके कुत्तोंको फीड और व्योंको कहते हैं। उसकी बुद्धि बड़ेही आश्चर्यमें डालनेवाली होती है इस जातिके कूत्तेको जल स्थल एकसे हैं। इस प्रकारके दो कुत्तोंने एक नगरमें शिक्षा पाई थी, पेरिस नगरीमें उनकी परीक्षा ली गई थी। एक कुत्तेका नाम फीड तथा दूसरेका नाम व्योंको था फीड गम्भीर था, व्योंको छिछोरा था। वह सदैव चुलबुलाता रहता था इधर उधर दौड़ता हुआ चलता था। यूनानी लेटिन इटालिक फरांसीसी तथा अंग्रेजी आदिसे कोई शब्द उनको दे दो तो उसे ढूँढ लाता था। यहाँ तक कि, जहाँ पचास २ अक्षर प्रत्येक भाषाके लिखे हुये पड़े हों उन सबमेंसे भी। उनके शब्दको ढूँढ लाया अपने स्वामीके पावोंपर रख दिया। जैसे अङ्ग्रेजी भाषामें एक शब्द हेवन है। हेवनका अर्थ बैकुण्ठ है। सुतरां समस्त अक्षर पृथक् पृथक् करे हुए रखे होते हैं। उस कुत्तेसे कहा गया कि शब्द हेवन ( HEAVEN ) बनाओ। तब वह कुत्ता गया और कटे अक्षर ढूँढ ढूँढकर लाता गया बराबर ला लाकर क्रमानुसार रखता गया और ( HEAVEN ) शब्द बनाकर दिखा दिया इन छः अक्षरोंमें दूसरा और पाँचवां ये दो अक्षर एकही प्रकारके हैं। यह अक्षर ( E ) ई है। यदि दो हो तो हेवन् शब्द ठीक हो जब उस कुत्तेने कटे अक्षरोंमें ढूँढा दूसरा अक्षर न पाया—केवल एकही देखा तब उनसे ऐसी बुद्धिमानकी कि, दूसरे अक्षर ( E ) को उठाकर पाँचवें स्थानमें धर दिया ( HEAVEN ) शब्दको पूरा करके दिखा दिया। इसी प्रकार गणित विद्यामें दोनोंकी परीक्षा ली गई वे दोनों गणितमें भी सुविज्ञ थे। समस्त अददोंको पृथक् पृथक् दिखा देते थे, तनिक विभिन्नता न पड़ती थी। यदि एक कुत्तेसे भूल होती थी तो दूसरा बुलाया जाता था। वह आकर उस त्रुटिको ठीक किया करता था वे दोनों कुत्ते फेड तथा व्योंको ताश खेलनेको बैठ जाते, अपने ताशको कभी नहीं भूलते थे उनमें एक हारता या जीतता था। उनका कौतुक देखनेके लिये अनेक मनुष्य एकत्रित होते वे दोनों कुत्ते खेलके सारे शब्दोंको जानते थे। वे भूलते नहीं थे, एककी त्रुटिको दूसरा शुद्ध करता था यह समस्त घटना उनके और उनके स्वामीके बीच होती थी। कुत्तोंमें ये दोनों बड़े पण्डित थे।

विविन्न पनिहा कुत्ता कुतिया—हेस्टिङ्ग नगर में एक मल्लाहके पास ऐसा पनिहा कुत्ता था कि, वह रोटी बेचनेवालेकी दूकानसे रोटी खरीद लाता। अपने स्वामीकी आज्ञा भली प्रकार पालन किया करता था। इस प्रकारकी एक कुत्ती भी थी, अपने स्वामीकी आज्ञानुसार पुस्तक उठा लाती। जो कार्य उसके योग्य होता उसको किया करती। किसी मनुष्यको बताकर उसको जो