भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 875

चीज दी जावे तो उसे वह उसके पास ले जाया करती थी । वह वस्तु उसको देकर चली आती थी । यहांतक कि, भारी बोझ उठाते उठाते उसके दांत टूट गये थे । आज्ञा मिलती कि, अमुक मनुष्यके पास तुम जाओ तो वह तुरन्त चली जाती थी । यदि वह न मिलता तो सामने आकर चुपचाप खड़ी हो जाती ।

प्राणदेनेवाला—एक विधवा स्त्रीके पास डंडी नामक एक कुत्ता रहता था । एक समय विधवाका दूसरा विवाह होनेवाला था । विवाह होनेके पहले डण्डीने सारा हाल जान लिया । इस बातसे कुत्ता बहुत रुष्ट हुआ ! उस स्त्रीसे प्रेम करना छोड़ दिया । वह विवश होकर कुत्तेको घर छोड़ गई क्योंकि, उसका विवाह लण्डन नगरमें होनेवाला था । जब तक विवाहका आयोजन होता रहा उतने समयतक वह उस स्त्रीके टेबुलके नीचे बड़े ही दुःखसे पड़ा रहा । उसको किसी तरह सन्तोष न होता था । प्रथम जिसको वह प्यार किया करता था उसके साथ भी न जाता, जिस प्रातःकालको उसकी मालिका उसको जहां छोड़ गई थी वह उसी स्थान पर पड़ा रहा तथा अपना शिर भी नहीं उठाता था । एक पञ्जा उठाकर आत्मिक दुःखको व्यक्त कर रहा था । उसकी मालिका चली गई । डण्डी गायब हो गया दूँढनेसे भी न मिला । अन्तमें एक दिन उसकी लाश मिली । लोगोंने पशुओंके हकीमसे पूछा कि, डण्डी किस बिमारीसे मरा । अभी तो उसकी उम्र थोड़ीसीही थी । हकीमने कहा कि, यह कुत्ता बिरहके दुःखसे मर गया है ।

भविष्य दृष्टि—टेरियर एक जातिके कुत्तेका नाम है । एक स्त्रीके पास स्काच टेरियर रहता था । वो स्त्री बलगेरिया नगरमें रहती थी । स्त्रीके मरनेके जब दो दिन रह गये तो उस कुत्तेने पहलेसे ही जान लिया कि, ऐसी घटना होनेवाली है । यह अत्यन्त आश्चर्यकी बात है कि, वह अपने घरके पीछे गया दो बड़े बड़े गढ़हे खोदे, जब उसकी मालिका मर गई तो उसने भी एक गढ़हेमें घुसकर प्राण त्याग दिये । यह बात एकही कुत्तेके साथ नहीं अनेकों कुत्तोंके साथ हुई ।

वर्तमानका ज्ञाता—हेण्टिंग नगरमें एक बीबीके पास एक कुत्ता रहता था । उसकी स्वामिनी तो ब्रिटेनको गई थी । वह नौकरोंके, साथ घरमें था । एक दिन सांझको वह कुत्ता अपनी मालकिनकी कोठरी में गया उसके कपड़े पर लोटने लगा । लोगोंने समझा कि, कदाचित् वह कुत्ता पागल हो गया है । दूसरे दिन चिट्ठी मिली कि, उसकी स्वामिनी उसी समय मर गई । जब कि, वह कुत्ता गये काल उसके कपड़ों पर लोट रहा था ।

मास्तिक जातिका कुत्ता—एक अङ्गरेजको लिये हये बागमें गया । वह