कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 877, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंकि, अत्यन्त बरफ पड़ती है वहाँ रहता है । वहाँ धर्मशाला बनी हैं, वहाँ पर बरमंक नामके एक प्रकारके फकीर रहते हैं, जो धर्मशालोंका प्रबन्ध रखवा करते हैं । वे लोग इस प्रकारके कुत्तोंको पालते हैं । इन कुत्तोंको सिखलाते हैं । पथिक जब उन बरफोंमें जा पड़कर मरने लगते हैं तो वे फकीर पथिकोंके बचानेके लिये कुत्तेको छोड़ते हैं । उन कुत्तोंकी सभी जातियोंकी अपेक्षा इन कुत्तोंमें अधिक बुद्धि होती है । ये कुत्ते बहुत शिक्षित होते हैं अत्यन्त बुद्धिमानोंके साथ काम किया करते हैं । धर्मशालाओंके लोग इस कुत्तेके गलेमें, गरम शराबकी बोटल बांध दिया करते हैं । स्वीट जर लेण्डके बरफीले पर्वतोंमें यह कुत्ता गिरे पड़े मुसाफिरोंको बरफोंमें ढूँढ़ा करता है । परमेश्वरने इन कुत्तोंको ऐसी बुद्धि प्रदान की, यदि मसाफिर पन्द्रह या बीस फीट बरफके नीचे दबाहो तो उसी समय बरफको खरोंच खरोंचकर टालना आरम्भ करता है । बहुत ऊँची आवाजसे भूंकता है । जिससे एक मीलसे भी अधिक उसकी आवाज चली जाती है । कुत्तेकी आवाज सुनकर धर्मशालाओंके महन्त आपहुँचते हैं । उसकी सहायता करते हैं । उपरोक्त कुत्तेकी कहानी एक अङ्ग्रेजी पुस्तक लाइबरेरी, आफ, इण्टर-टेनिङ्ग, एलफारफीसमें लिखी है कि, इस कुत्तेने बाईस मनुष्योंकी जान बचाई थी । इस कारण कुत्तेके गलेमें उसकी सुकीर्तिका तगमा पहनाया था ।
एक बार यह कुत्ता एक पथिककी जान बचाने और उसकी धर्मशालामें लानेका उद्योग कर रहा था । वह सन् १८१६ ई० में मर गया और उसके स्मारक चिह्नके लिये उसकी एक सुविशाल सभाधि बनाई गई । वे पहाड़ी लोग अबतक भी उस कुत्तेकी भलाईको नहीं भुला सके हैं ।
इस कुत्तेको धर्मशालाओंके बरमंक लोग पर्वतोंमें भेजते हैं वह वफोंमें जाकर मुसाफिरोंको ढूँढ़ता फिरता है । जहां कहीं बरफका मारा अचेत पथिक दिखाई देता है तो उसके ऊपर बैठ जाता है अपने बालोंसे उसको भली प्रकार गरमाता है । उस कुत्तेके शरीर पर बहुत बाल होते हैं । उन बालोंकी गरमीसे पथिक कुछ चैतन्यता लाभ करता है वह उसको गलेकी बोटल विखाता है । वह मुसाफिर बोटलको उसके गलेसे खोलकर पीता है जिससे सचेत हो जाता है । कुत्ता पथिकको अपनी पीठपर लादकर धर्मशालेमें ले आता है । धर्मशालाओंके साधुगण उसकी भली प्रकार सेवा करते हैं वह आरोग्यता लाभ कर अपने घरको चला जाता है ।
निउफौण्ड लेण्ड डाग—नामके कुत्तेको एक साहब अपने मित्र सहित अपने साथ लिये चले जाते थे । कुत्तेके स्वामीने कुत्तेकी बहुत प्रशंसा करके कहा