कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 891, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंअनेक बालक पढ़ रहे थे वहाँ पर योगी बीन बजाने लगा । अनेकों लड़के उसकी बीन सुननेको बाहर निकल पड़े बीन सुन योगीको कुछ दे अपनी राह लगे । एक लड़का खड़ा २ बहुत देरतक बीन सुन सुनकर प्रसन्न होता रहा फिर चुपकेसे अपनी जेबमेंसे पांच रुपये निकाल योगीको दे उसने भी अपनी राह ली । जब वह योगी अपने घर गया और अपने पितासे उसने यह बात कही। तब उसके पिता ने कहा कि, ऐ पुत्र ! वह नागवंशी होगा नहीं तो बीनका स्वर सुनकर तुमको पांच रुपया कौन देनेवाला है ? यह केवल सांपकाही कार्य है कि, वह बीनकी आवाज सुनकर बहुत हर्षित होता है । अच्छा, अब मैं जाकर उसको पहचान लेता हूँ । उसके पिताने पाठशालाके निकट जाकर बीन बजाना आरम्भ किया । लड़के बीन सुनने आये योगीको कुछ दे देकर अपनी राहली । वही बालक देरतक प्रसन्न हो होकर बीन सुनता रहा फिर योगीको उसी प्रकार पारितोषिक देकर चला गया योगी उःउके पीछे पीछे दूर मैदानमें गया लड़केने कहा कि, ऐ योगी ! तू किस अभिप्रायसे मेरे पीछे आता है तू जो मांगे सो दूँ, मेरा पीछा मतकर । बालक तथा उस योगीकी कहानी बहुत लम्बी है । लड़केने योगीको अनेक कौतुक दिखाये । अपनी बहुत सिद्धि प्रगट की योगीको प्रसन्न करके घर लौटा दिया ।
सांड बननेवाला सांप — इसी प्रकारकी एक बात और सुनी गई है कि, पंजाब फीरोजपुर जिलेके कब्रबच्छागाममें सबेरेके समय गांवके सब पशु जड़लमें घास चरने जाया करते । चितकवरा सांड बनमेंसे आकर उस झुण्डमें और आ मिलता था । समस्त दिन ढोरोके साथ चरता फिरता था । सांडके समय सारे पशु गांवको लौट आते, वह भी गांवके निकट तक आता, सारे पशु तो गांवके भीतर चले आते, वह बाहरसेही पुनः बनकी राह ले लेता । चरवाहे रोज यह कौतुक देखा करते । उससे अनेकों गायें गर्भिणी हुई थीं । उनसे उसी स्वरूपकी बछिया तथा बैल उत्पन्न होने लगे । सभोंका चितकवरा रङ्ग और आँखें गोल थीं । कुछ कालके पीछे एक योगी उस गांवमें आया । उसने उसका हाल सुना तो जान लिया कि, यह सांप है सांड नहीं है । योगी उसके पीछे पड़ा । एक दो दिनतक उसका कौतुक देखता रहा । निश्चय कर लिया कि, यह सांप है । एक दिन सांड गांवके समीपसे बनकी ओर चला, वह योगी दूरतक उसके पीछे चला गया । घने बनमें एक बिलके सामने पहुंचकर बैल पृथिवी पर लोट पोटक के सर्प बनकर उसमें घुस गया । योगीने भली प्रकार अपनी आँखोंसे देख लिया बिलको पहचान लिया । उसने जाकर दूसरे योगियोंको समाचार दिया । कई एक मन्त्र प्रवीण योगी वहाँ आ पहुंचे । उस सांपको पकड़ लिया । जब सांप अपने त्रिलमें गया उस समय योगियों