भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 893

पूछे । साँझ होगई अन्धकार हो चला, भटकते २ उसको एक ऊसर स्थान मिला जहाँ घास नहीं जमी थी, स्वच्छ स्थानको देखकर वहीं बैठ गया, भूख प्यास तथा भयके कारण नींद न आई । रातको क्या देखता है कि, उस श्वेतभूमिके बिलसे एक सांप निकल पड़ा—वह समूचा तो बिलके भीतर था पर हाथ भर बाहर निकल आया अपने बिलके बाहर लकड़ीके समान खड़ा रहा । यह कौतुक देख वह मनुष्य आश्चर्यान्वित होके सोचने लगा कि, यहां तो कोई वृक्ष अथवा पौधा नहीं था, यह ठूठ कौसा खड़ा जान पड़ता है । अपने मनमें यही सोच रहा था कि, इतनेमें कुछ दूरसे ऐसी आवाज आने लगी कि, मानों दो मनुष्य परस्पर बातें कर रहे हैं । उन दोनोंमेंसे एकने पुकार कर कहा कि, अमुक सर्प अपने घरमें है कि, नहीं ? दूसरे सांपने मनुष्यके स्वरमें उत्तर दिया कि, मैं अपने घरमें ही हूँ। उसने कहा कि, तू जा और यहांसे तीन कोसके अन्तर पर अमुक गांवमें अमुक महाजन रहता है उसको तू काट, यही परमेश्वरकी आज्ञा है । उसने उत्तर दिया कि, मैं कैसे जाऊं ? मेरे घर एक महिमान आया है मैं उसीकी चौकसी कर रहा हूँ । जिसमें कोई हिंसक पशु उसको मार न डाले, नहीं तो मुझे बड़ा प्राप होगा । उसने कहा कि, तू जा उसको काट हम दोनों तेरे अतिथिकी रक्षा करेंगे । सर्पने कहा कि, मैं उस महाजनको कैसे काटूँ ? उन्होंने कहा कि, महाजनके घरमें चूल्हेके पीछे एक तम्बाकूका डब्बा धरा है, तू जा उस डब्बेके पास बैठ रह जब वह तम्बाकू लेनेको आवे तो तू काट खाना, वे दोनों मनुष्यवागभाषी सर्प यमके दूत थे, वहीं खड़े होकर उस मनुष्यकी चौकीदारी करने लगे वह सांप जाकर महाजनके घरमें घुस तम्बाकूके डब्बेके पीछे बैठा । जब वह महाजन तम्बाकू लेनेको गया तो सांपने काटखाया वह मर गया पीछे वह सांप अपने बिलको पलट आया, वे दोनों यमदूत उस महाजन के जीवको ले गये ।

वह बहुत विषैला सर्प था, उसके विषके कारण उस भूमिपर वृक्ष न उगते थे । प्रातःकाल होते ही सर्प अपनी बाँबीमें घुस गया. हलकारा उपरोक्त बात की सत्यता जाननेके लिये गाँवमें गया. उसने बनियाके घर जाकर देखा तो रोना पीटना पड़ रहा है । मनुष्य पशु है, पशु मनुष्य है दोनोंमें कुछ भेद नहीं, जिसने सत्य ज्ञान पाया है वही मनुष्य है शेषके सभी पशु हैं ।

मानुषीके गर्भसे बाबा धारीराम सांप — पचास वर्षसे पहिलेकी बात है जौनपुरसे लगभग बारह कोसके अन्तर पर ताखा नामक एक गाँव है, उसमें एक कायस्थजातिकी स्त्री गर्भिणी हुई । प्रसवके समय बच्चोंके बदले उसके पेटसे एक थैली निकली । स्त्रियोंने उस थैलीको तोड़ा तो उसके भीतरसे सांपके अनेक