भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बच्चे निकल पड़े, लोगोंने देखा तो उन सबको मार डाला पर उनमेंसे एक बच्चा कोठीके बीच छिप रहा, वहाँके लोगोंको इस बातका कुछ भी पता न चला। परमेश्वर उसकी रक्षा करने लगा। कायस्थ अपनी आयु सम्पूर्ण करके मर गया। उसके पाँच अथवा चार बेटे थे, उनमें आपसमें फूट हुई, वे जुदे २ होने लगे। अपने पिता का धन भी आपसमें बाँटने लगे। वह कायस्थ बहुत धनाढ्य था, बहुत धन छोड़ कर मरा था। वे भाई तराजूसे तौलतौलकर रुपये बाँटने लगे उन्होंने अपने भागके अनुसार ढेर लगाया वे तो पाँच ढेर लगाते थे, पर छः हो जाते थे। उन लोगोंने कई बार ढेर लगाये पर प्रत्येक बार रुपयोंका एक ढेर बढ़ा जाया करता था। उन लोगों को अत्यन्त आश्चर्य हुआ। विचारने लगे कि, अवश्यही इस एक ढेरका स्वामी कोई है। तब उन लोगोंने पुकारके कहा कि, इस ढेरका जो स्वामी हो वह यहाँ आकर उपस्थित हो जाय। सर्प कोठलीके नीचे से आकर एक ढेरके ऊपर बैठ गया। उन लोगोंने जान लिया कि, यह हमारा भाई इस ढेरका स्वामी है, लोगोंने उस दिनसे उस साँपका नाम धारीराम रक्खा। यह धारीराम बहुत अच्छा साँप था उनके घरमें रहा करता था। उनके घरका काम काज किया करता था। वे कायस्थ खेती बारीका काम कराते थे। जहाँ कहीं कुछ प्रयोजन होता था तो धारीरामको भेजा करते थे। इस गाँवके समस्त मनुष्य धारीरामको जानते थे, उससे कोई भी भयभीत न होता था, मजदूरोंकी अवश्यकता होती थी तो घरके लोग कह देते थे कि, जाओ मजदूरोंको बुला लाओ। धारीराम मजदूरोंके घर जाकर द्वार खट-खटाता मजदूर जान लेते कि, बाबा धारीराम आए, शीघ्र चलो। समस्त मजदूरों को एकत्रित करके काममें लगा देता सब कुछ देख रेख किया करता था। गाँवके सारे मनुष्य उसको बाबा धारीराम कहा करते थे। सभी नौकरोँ तथा मजदूरोंसे बाबा धारीराम काम लिया करता था कभी किसीको भी कष्ट न पहुँचाता था बड़ा ही भला था।

एक दिवसका हाल है कि, बाबा धारीराम किसी काय्यवश बाहर चला जाता था। उधरसे परदेशी बनजारे बैल लादे चले जाते थे। वे सब इस साँपके स्वभावसे अनभिज्ञ थे, इस कारण उसको मार एक झाड़ीपर रखकर चले गये। धारीरामने अपने भाइयोंको स्वप्न दिया कि, मुझको बनजारे मारकर अमुक झाड़ीपर रखकर चले गये हैं, घरके लोग वहाँ गये। झाड़ीपर साँपका शव मिला। उसको वहाँसे उठा लाये हिंदुओंकी रीतिके अनुसार उसकी अंतिम क्रिया की। उस समय मैं बालक था मेरी जन्मभूमिसे पाँच कोसके अन्तरपर ताखा गाँव है जहाँकी कि, यह घटना है। प्रायः जब लोग साँप देखते साँपके आक्रमणके भीतर आते तो

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