भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 931

देख कर लोगोंने जाना कि, इस खोतेके भीतर कुछ है जिसके कारण यह हिलता है । फड़ाके देखा तो सांप निकल पड़ा लोगोंने उसको मार डाला । इस युक्तिसे चण्डूलने सांपको अपने बच्चोंके बदलेमें मार लिया ।

विचित्र कर्तव्य — फिरोजपुरमें एक मनुष्यने चण्डूलको विचित्र कर्तव्य सिखाया था । उसके पास सोने चाँदीकी दो अँगूठियाँ थीं, वह दोनों अँगूठियोंको दूर रख कर कहता कि, चाँदीकी अँगूठी ला वह चाँदीकी अँगूठी लाता । जब वह कहता कि, सोनेकी अँगूठी ला तो सोनेकी लाता कुछ भी फर्क न पड़ता था ।

समझदार चिड़िया — फिरोजपुरके दूधगांवमें साहूकारके चौबारे पर एक साधू रहता था एक छोटी चिड़िया उसके समीप आकर अत्यन्त मधुर स्वरमें बोला और गाया करती थी । एक दिन वहाँ मुसलमान आ बैठे उस समय भी वहाँ चिड़िया आकर बोलने लगी । मुसलमानने कहा कि, मैं इसको फँसाऊंगा । चिड़ियाने यह बात सुनली । वह उस दिनसे उस जगह आना छोड़ दिया । दूर दूर बोलती पर उस जगह कभी न आती थी ।

थसकी बोली — एक प्रकारकी चिड़िया होती है उसका प्राकृतिक गुण यह है कि, बहुत मधुर भाषी होती है । भांति भांतिके मोठे राग गाया करती है नाना प्रकारकी बोलियाँ बोलती है । वह कुत्तोंकी तरह भूकती और बिल्लीकी तरह म्याँव २ भी करती है । मनुष्यके स्वरमें स्वच्छ बोलती है । बोरडरप साहबने स्वयम् अपने मित्रों सहित सुना था कि, वह बोलती थी । 'मेरी प्यारी । मेरी सुन्दरी प्यारी । मेरी छोटी सुन्दरी प्यारी ।'

सुर्खसीना ।

एक पक्षी होता है इसका खोता पुष्पके बरतनोंके पास था उसी जगह एक सांपने आकर उसका घोंसला घेर लिया । चिड़िया बागवानके मोड़े पर बैठ कर उच्च स्वरसे बोलने लगी । अपने खोतेकी ओर दौड़ती । पहले तो मालीने उस चिड़ियाके इशारेको न समझा । चिड़िया उसके मोड़े पर आबैठी उसी प्रकार बोलने लगी । मालीने बिचारा कि, यह निडर चिड़िया मेरे मोड़े पर आकर शब्द करके फिर अपने घोंसलेकी ओर दौड़ जाती है इसका कोई अवश्य कारण है, यह कुछ कहती है । उसने जाकर देखा त्हे उसका खोता सर्प द्वारा घिरा हुआ था । तब तक उसके बच्चोंको किसी प्रकारका कष्ट नहीं पहुँचा था । मालीने सर्पको मार डाला धन्यवाद देनेके बदले चिड़िया मधुर गाना गाने लगी ।

बड़ीआबाबील ।

कप्तान ब्राउन साहब कहते हैं कि, बड़ी जातिकी एक आबाबील थी उसके