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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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मुहम्मदबोध

चौथे लाहूतका वृत्तान्त

चौथा लाहूत है जबलूत और लाहूतके बीचमें ग्यारह पालंगका अन्तर है, और एक पालंग आठ करोड़ योजनाका है । यह लाहूत स्थान अक्षरका है यहाँ अक्षर और योगमाया रहते हैं वह बड़ा सुन्दर स्थान है । जब कबीर साहब और मोहम्मद साहब इस स्थानपर पहुँचे तब कबीर साहबने मोहम्मद साहबसे कहा कि हे मुहम्मद ! देखो यह तुम्हारा स्थान है—और यहाँही वह अक्षर पुरुष जिसको तुम बेचून बेधेरा खुदा कहते हो रहता है और उस स्थानके गुण दिखलाकर आगेको चले ।

पाँचवे हाहूतका वृत्तान्त

पाँचवाँ हाहूत है—यह हाहूत स्थान एक असंख्य योजना शून्यके ऊपर है—अर्थात् लाहूत और हाहूतके बीचमें एक असंख्य योजना शून्य और अंधकार है—यह हाहूत स्थान अचिन्त पुरुषका है—यहाँ अचिन्त पुरुष सपत्नीक रहता है—और यह स्थान बड़ा ही मनोहर है—अचिन्तके सामने तीन सौ अप्सराएँ नृत्य करती रहती हैं—और यह निःशंक तथा निर्द्वंद्व रहता है कबीर साहब इस स्थान और अचिन्त पुरुषका सब विवरण मुहम्मद से कह करके आगेको चले ।

छठवाँ बाहूतका वृत्तान्त

यह बाहूत छठा स्थान है । और बाहूत और हाहूतके बीचमें तीन असंख्य योजना शून्य और अंधेरा है और हाहूतसे बाहूत तीन असंख्य योजनाको उंचाईपर है—यह अत्यन्त मनोहर स्थान है इस स्थानमें सोहँ पुरुष रहता है—और सोहँ पुरुषको अधीगिनीका नाम ओहँ है—यह सोहँ पुरुष अपनी शक्ति ओहँ सहित सिंहासनपर अधिकृत है—और उस स्थानमें सदैव सोहँका शब्द सुनाई दिया करता है । जब कबीर साहब मुहम्मदको लेकर इस स्थानपर पहुँचे तो वहाँके समस्त गुणोंका विवरण उन्होंने उनसे किया और फिर आगे चले ।

सातवें साहूतका वृत्तान्त

यह साहूत बाहूतसे पाँच असंख्य योजना ऊँचा है, और बाहूत और साहूतके बीचमें पाँच असंख्य योजना शून्य और अत्यन्त अंधकार है । यह इच्छाका स्थान है । इस स्थान की सुन्दरतम तथा यहाँकी सुखसामग्रीका भी विशेष विवरण है कबीर साहब मुहम्मद साहबको दिखलाकर आगे चले ।

आठवें राहूतका वृत्तान्त

राहूत साहूतके ऊपर चार असंख्य योजना ऊँचा है । साहूत तथा राहूतके बीचमें चार असंख्य योजना शून्य और अत्यन्त अंधकार है और इस राहूत स्थानमें अंकुर पुरुष अपनी शक्ति सहित रहता है—यह अत्यन्त सुन्दर तथा मनोहर स्थान है । जब कबीर साहब मुहम्मद साहबको लेकर इस स्थानमें पहुँचे तो उसके सब गुण दिखलाकर आगे चले ।