भारतकोश
कल्याण: उपनिषद् अङ्क

कल्याण: उपनिषद् अङ्क

Kalyan Upanishad Ank

गीताप्रेस द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished832 पृष्ठ

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( ८ ) पृष्ठ-संख्या | पृष्ठ-संख्या २. पञ्चाग्निविद्या और उसे जाननेका फल, त्रिविध गतिका वर्णन ... ५०३ | ६३-श्रीरामोत्तरतापनीयोपनिषद् .. ५४२ | काशी एव तारक मन्त्रकी महिमा, ॐकार-रूप पुरुषोत्तम रामके चार पाद .. ५४२ ३. मन्थ विद्या और उसकी परम्परा . ५०५ | ६४-गोपालपूर्वतपनीयोपनिषद् .. ५५१ ४. सन्तानोत्पत्ति-विज्ञान ... ५०६ | १ श्रीकृष्णका परब्रह्मत्व, उनका ध्यान करने-योग्य रूप तथा अष्टादशाक्षर मन्त्र . ५५१ ५. समस्त प्रवचनकी परम्पराका वर्णन . ५०९ | २. श्रीकृष्णोपासनाकी विधि तथा यन्त्र-निर्माणका प्रकार .. .. ५५२ ६१-कौषीतकिब्राह्मणोपनिषद् . . ५११ | ३. अष्टादशाक्षरका अर्थ .. .. ५५५ (१) प्रथम अध्याय ५११ | ४. गोपाल-मन्त्रके जपकी महिमा, उसमे गोलोक-धामकी प्राप्ति . ५५६ पर्यङ्क-विद्या . . ५११ | ५. श्रीकृष्णका स्वरूप एवं उनका स्तवन . ५५६ (२) द्वितीय अध्याय ५१५ | ६५-गोपालोत्तरतापनीयोपनिषद् ५५९ प्राणोपासना ... .. ५१५ | राधा आदि गोपियोका दुर्वासासे सवाद, दुर्वासाके द्वारा श्रीकृष्णके स्वरूपका वर्णन . ५५९ आध्यात्मिक अग्निहोत्र ... ५१६ | ६६-नृसिंहपूर्वतपनीयोपनिषद् ... ५६७ विविध उपासनाओंका वर्णन .. ५१७ | १. नरसिंह-मन्त्रराजकी महिमा तथा उसके अङ्गोंका वर्णन . ५६७ दैवपरिमररूपमें प्राणकी उपासना ५१९ | २ मन्त्रराजकी शरण लेनेका फल, उसके अङ्गोका विशद वर्णन, न्यासकी विधि तथा मन्त्रके प्रत्येक पदकी व्याख्या ५६९ मोक्षके लिये सर्वश्रेष्ठ प्राणकी उपासना ५२० | ३ मन्त्रराज आनुष्टुभकी शक्ति तथा बीज ... ५७३ प्राणोपासकका सम्प्रदान-कर्म . ५२१ | ४. मन्त्रराज आनुष्टुभके अङ्गभूत मन्त्र, अप्रत-वाच्यरूप भगवान् नृसिंहदेवके चार पाद, स्तुतिके मन्त्र . ५७३ (३) तृतीय अध्याय . ५२३ | ५. आनुष्टुभ मन्त्रराजके सुदर्शननामक महाचक्रका वर्णन, मन्त्रराजके जपका फल ५७७ इन्द्र-प्रतर्दन-संवाद, प्रज्ञास्वरूप प्राणकी महिमा .. ५२३ | ६७-नृसिंहोत्तरतापनीयोपनिषद् ५८० (४) चतुर्थ अध्याय . ५२७ | १. 'ॐ' नामसे परमात्म तत्त्वका तथा उसके चार पादोंका वर्णन, चौथे पादके चार भेद ५८० अजातशत्रु और गार्ग्यका सवाद .. ५२७ | २. परमात्माके चार पादोंकी ओंकारकी मात्राओंके साथ एकता, मन्त्रराज आनुष्टुभके द्वारा तुरीय परमात्माका ज्ञान ... ५८२ ६२-श्रीरामपूर्वतपनीयोपनिषद् .. ५३१ | ३ अनुष्टुभमन्त्रराजके पादोंके अलग-अलग जप तथा ध्यानकी विधि ... ५८५ १ राम-नामके विविध अर्थ, भगवान्‌के साकार तत्त्वकी व्याख्या; मन्त्र एवं यन्त्रका माहात्म्य ५३१ | ४ अपने आत्माका पहले तुरीय-तुरीयरूपमे और पीछे भगवान् नृसिंहके रूपमें ध्यान करके ब्रह्मके साथ अपने-आपको एकीभूत करनेकी विधि ... ... ... ५९१ २ श्रीरामके स्वरूपका कथन, राम-बीजकी व्याख्या ५३२ | ३ राम-मन्त्रकी व्याख्या, जपकी प्रक्रिया तथा ध्यान ५३२ | ४ षडक्षर-मन्त्रका स्वरूप, भगवान् श्रीरामका स्तवन ५३३ | ५ खरके वधसे लेकर बाली-वधतकका संक्षिप्त चरित्र ५३४ | ६. शेष चरित्रका संक्षिप्त वर्णन; आवरण-पूजाके लिये यन्त्रस्थ देवताओंका निरूपण . ५३४ | ७. पूजा-यन्त्रका विस्तृत वर्णन .. ५३६ | ८. पूजा-यन्त्रके अगले अङ्गोंका वर्णन ५३६ | ९. पूजा-यन्त्रके शेषभागका वर्णन तथा श्रीरामके माला-मन्त्रका स्वरूप एवं माहात्म्य . ५३७ | १०. पूजाकी सविस्तर विधि ... . ५३८ |