कल्याण: उपनिषद् अङ्क
Kalyan Upanishad Ank
गीताप्रेस द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ९ ) पृष्ठ-संख्या पृष्ठ-संख्या ५. अनुष्टुप्-मन्त्रका ओंकारमें अन्तर्भाव करके के सम्बन्धसे ब्रह्मकी जगत्-स्वरूपता और उसीके द्वारा परमात्माके चिन्तनकी विधि ५९२ समाधिका वर्णन . ६४२ ६. अपने-आपको प्रणवके वाच्यार्थ परब्रह्ममें ७६-देव्युपनिषद् .. ६४६ विलीन करनेकी विधि ५९४ देवीकी ब्रह्मस्वरूपता, देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति, ७ परमात्मा तथा आत्माकी एकताका अनुभव देवी-महिमा और इसके पाठका फल ६४६ एवं चिन्तन करनेका प्रकार ५९५ ७७-बह्वृचोपनिषद् .. ६४९ ८. भयरहित ब्रह्मरूप हो जानेकी विधि .. ५९७ देवीसे सबकी उत्पत्ति और देवीकी ब्रह्मरूपता ६४९ ९. प्रणवके द्वारा आत्माको जानकर साक्षिरूपसे ७८-सौभाग्यलक्ष्म्युपनिषद् . ६५० स्थित होनेकी विधि ५९९ १ श्रीमहालक्ष्मीका श्रीसूक्तके अनुसार ६८-महोपनिषद् . ६०३ ध्यान, न्यास, पूजन और यन्त्रकी विधि ६५० १. सृष्टिकी उत्पत्तिका वर्णन ६०३ २ योगसम्बन्धी उपदेश ६५२ २. शुकदेवजीको आत्माके सम्बन्धमें जनकका ३. नवचक्र-विवेक ६५३ उपदेश, जीवन्मुक्ति और विदेहमुक्तिका स्वरूप ६०४ ४ श्रीसूक्त ६५५ ३. निदाघके वैराग्यपूर्ण उद्गार ६०७ ७९-सीतोपनिषद् ... ६५७ ४. निदाघके प्रति उनके पिता ऋभुका उपदेश ६०९ श्रीसीताजीके स्वरूपका तात्त्विक वर्णन ६५७ ५ ऋभुका उपदेश चालू, अज्ञान एवं ज्ञानकी ८०-श्रीराधातापिनीयोपनिषद् .. ६६० सात भूमिकाएँ . ६१४ श्रुतियोंद्वारा श्रीराधिकाजीकी उपासना और ६ ऋभुका उपदेश चालू ६२० स्तुति ६६० ६९-मुक्तिकोपनिषद् ... ६२३ ८१-श्रीराधोपनिषद् ... .. ६६२ १ श्रीराम और हनुमान्का संवाद, वेदान्तकी श्रीराधाजीके स्वरूप तथा नामोंका वर्णन ६६२ महिमा, मुक्तिके भेद, १०८ उपनिषदोंकी ८२-ब्रह्मबिन्दूपनिषद् .. ६६४ नामावली तथा वेदोंके अनुसार विभाग, मनके लयका साधन, आत्माका स्वरूप तथा उपनिषदोंके पाठका माहात्म्य तथा उनके ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय ६६४ श्रवणके अधिकारी ६२३ ८३-ध्यानबिन्दूपनिषद् . ६६६ २. जीवन्मुक्ति एवं विदेहमुक्तिका स्वरूप, उनके ध्यानयोगकी महिमा तथा स्वरूप ६६६ होनेमें प्रमाण, उनकी सिद्धिका उपाय तथा ८४-तेजोबिन्दूपनिषद् . ६६८ प्रयोजन . ६२६ प्रणवस्वरूप तेजोमय बिन्दुके ध्यानकी महिमा ७०-गर्भोपनिषद् . ६३० तथा उसके अधिकारी एवं अनधिकारी ६६८ गर्भकी उत्पत्ति एव वृद्धिके प्रकार ६३० ८५-नादबिन्दूपनिषद् .. ६६९ ७१-कैवल्योपनिषद् . ६३२ ( १ ) प्रथम अध्याय ६६९ आत्माका स्वरूप तथा उसे जाननेका उपाय ६३२ १ ॐकारकी हंसरूपमें उपासना ६६९ ७२-कठरुद्रोपनिषद् .. ६३४ २ ॐकारकी बारह मात्राएँ और उनमें संन्यासकी विधि और आत्मतत्त्वका वर्णन . ६३४ प्राणवियोगका फल . ६६९ ७३-रुद्रहृदयोपनिषद् ... ६३७ ३ योगयुक्त स्थितिका वर्णन ६७० भगवान् रुद्रकी सर्वश्रेष्ठता, सर्वस्वरूपता और ( २ ) द्वितीय अध्याय ६७० ब्रह्मस्वरूपता ६३७ १ ज्ञानीके लिये प्रारब्ध नहीं रह जाता .. ६७० ७४-नीलरुद्रोपनिषद् .. ६४० २ नादके अनेक प्रकार .. ६७१ भगवान् नीलरुद्रकी महिमा और शिव-विष्णुकी ३ नादानुसन्धान .. ६७१ एकता .. ६४० ( ३ ) तृतीय अध्याय ६७१ ७५-सरस्वतीरहस्योपनिषद् .. ६४२ १ नादके द्वारा मन कैसे वशीभूत होता है ६७१ दस बीजमन्त्रोंसे युक्त ऋग्वेदके मन्त्रोंसे २ नादमे मनका लय .. ६७२ सरस्वती देवीकी स्तुति, उसका फल, नाम-रूप- ३ मनके अमन हो जानेकी स्थितिका वर्णन ६७२ आ-