भारतकोश
कल्याण: उपनिषद् अङ्क

कल्याण: उपनिषद् अङ्क

Kalyan Upanishad Ank

गीताप्रेस द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished832 पृष्ठ

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दुर्गति-नाशिनि दुर्गा जय जय, काल-विनाशिनि काली जय जय । उमा रमा ब्रह्माणी जय जय, राधा सीता रुक्मिणि जय जय ॥ साम्ब सदाशिव, साम्ब सदाशिव, साम्ब सदाशिव, जय शंकर । हर हर शंकर दुखहर सुखकर अघ-तम-हर हर हर शंकर ॥ हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥ जय-जय दुर्गा, जय मा तारा । जय गणेश, जय शुभ-आगारा ॥ जयति शिवा-शिव जानकि-राम । गौरी-शंकर सीता-राम ॥ जय रघुनन्दन जय सिया-राम । व्रज-गोपी-प्रिय राधेश्याम ॥ रघुपति राघव राजा राम । पतितपावन सीता-राम ॥

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\left. {l} वार्षिक मूल्य भारतमें ६॥) विदेशमें ८॥=) (१३ शिलिङ्ग) \right} जय पावक रवि चन्द्र जयति जय । सत्-चित्-आनंद भूमा जय जय ॥ {l} इस अङ्कका मूल्य ६=) विदेशमें ८॥=) (१३ शिलिङ्ग) \phantom{\left. {l} वार्षिक मूल्य \right}} जय जय विश्वरूप हरि जय । जय हर अखिलात्मन् जय जय ॥ \phantom{\left. {l} वार्षिक मूल्य \right}} जय विराट जय जगत्पते । गौरीपति जय रमापते ॥

सम्पादक—हनुमानप्रसाद पोद्दार, चिम्मनलाल गोस्वामी, एम्० ए०, शास्त्री मुद्रक-प्रकाशक—घनश्यामदास जालान, गीताप्रेस, गोरखपुर