कर्मयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)
Karma Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)
by स्वामी विवेकानन्द / पं. बदरीदत्त शर्मा
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Read in contextतीसरा अध्याय
धर्म क्या है ?
कर्मयोग की मीमांसा करने में यह जानना भी परमावश्यक है कि धर्म क्या है ? यदि मुझको कुछ काम करना है तो काम करने से पहले यह जान लेना चाहिए कि मेरा धर्म क्या है ? तभी मैं उसको भले प्रकार कर सकूँगा। धर्म के विषय में भिन्न भिन्न मतों के विचार भिन्न भिन्न हैं। मुसलमान कहते हैं कि जो कुछ कुरान में लिखा हुआ है, वही उनका धर्म है। हिन्दू कहते हैं कि वेद की जो आज्ञायें हैं, वही धर्म है। ईसाई अपनी इंजील का प्रमाण देते हुए उसकी आज्ञाओं को अपना धर्म बतलाते हैं। इन सब पर विचार करने से हम इस परिणाम पर पहुँचते हैं कि मनुष्य-समुदाय के भिन्न भिन्न भागों में, इतिहास के भिन्न भिन्न समयों में और मनुष्य की भिन्न भिन्न जातियों में धर्म की अवस्था भिन्न भिन्न प्रकार की थी। और बहुत सी कठिन परिभाषाओं की तरह धर्म की व्याख्या करना भी कोई सुकर कार्य नहीं है। हम केवल पार्श्ववर्त्ती चिह्नों तथा कर्म के प्रत्यक्ष फलों को देख कर धर्म का कुछ विधान कर सकते हैं। जिस समय हमारी आँखों के सामने कोई घटना संघटित होती है, उस समय हमको विशेष रीति पर उसके कारण के