करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
by सतगुरु मधु परमहंस जी
Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)
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Read in contextकुछ शंकाओं का निराकरण
मुझसे काफ़ी लोग सवाल करते हैं । उनमें वज़न होता है । कुछ सवाल करते हैं कि क्या परम-पुरुष को नहीं पता था कि जीवों को निरंजन तंग करेगा। फिर आत्माएँ क्यों दीं ? मेरा जवाब होता है कि इतना सुरक्षित करके दिया है कि निरंजन इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। कुछ कहते हैं कि एक लाख जीव निगलने का शाप देना तो आत्मा को सजा हुई । नहीं, यह तो मन को सज़ा है । आत्मा का कुछ नहीं होता है। वो सुरक्षित है। कुछ लोग कहते हैं कि परम-पुरुष चाहे तो आत्माओं को मुक्ति नहीं दे सकता क्या ? एक पल में दे सकता है । पर फिर उनका शब्द नहीं कट गया, जो निरंजन को 17 चौकड़ी असंख्य युगों का राज्य करने के लिए दिया है! कुछ कहते हैं कि आत्मा का क्या कसूर था ? इसलिए आपके जीवन में एक मौका मिलेगा उस देश में जाने के लिए ।