भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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समझ लिया न उसका कष्ट क्या था । मैंने ही पाखंड का विरोध किया है। इसी से सयाने डर रहे हैं। साहिब नाम के आगे भूत टिक नहीं पायेंगे । चाहे चांडाल भी आ जाए, सयाने तो भीड़ इकट्ठी करते हैं, सोचते हैं कि साहिब की रौनक कम हो। हमने किसी से ठगी नहीं की, पर दुनिया बड़ी ज़ालिम है, बड़ी झूठी है, बड़ी बदतमीज है। जितनी मेरे तक आने में रुकावट है, उतनी कहीं नहीं, क्योंकि जितना मैंने पाखंडियों को निचौड़ा है, उतना कोई नहीं । आगे आगे देखना, छिपेंगे ये। अभी अधमरे हो गये हैं । आजकल तो कसमें खिला रहे हैं कि साहिब बंदगी में नहीं जाना है। अरे भाई, हमने तो आपको इंसान बनाया, जिंदगी जीना सिखाया। खैर, आप चिंता नहीं करना, साहिब की भक्ति में बड़ी ताक़त है । यह ताक़त बड़ी निराली है, इसलिए दिल में यही भाव रखना-

मुझे है काम सतगुरु से, दुनिया रूठे तो रूठन दे ।।

मन तू हंसन हो साहिब के भटकत काहे फिरै ।

सतगुरु छोड़ और को धयावै, कारज इक न सरै ॥

साधुन सेवा कर मन मेरे, कोटिन व्याधि हरै ।

कहत कबीर सुनो भाई साधो, सहज में जीव तरै ॥

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