करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 248, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंगयीं। उन्हें काल से कोई नहीं बचा सका । इधर बुखार भी हो जाए तो दुनिया कहती है कि देखो-देखो, साहिब बंदगी में चला गया, इसलिए बीमार हुआ । हमने आपको एक ही बिंदू पर एकाग्र किया कि साहिब को पकड़े रहना। मुसीबतें आयेंगी; दिक्कतें आयेंगी, पर साहिब को नहीं छोड़ना, पकड़े रहना ।
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय ।
टूटे ते फिर न जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय ।।
दुनिया रूठेगी भी, पर साहिब को पकड़े रहना। खेलना हो तो खेलिये, पक्का होकर खेल ।
कच्ची सरसों पेर के, खड़ी भया न तेल ।।
एक ने कहा कि आपसे डर लगता है । आपको कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है। ऑटोमेटिक आपके मुँह से वही निकलता है। हमारे पास दूसरा कॅम्प्यूटर है भाई | हम कमाई की बात नहीं कर रहे हैं; बस, आपसे कह रहे हैं कि जो दिया, उसे संभालना। घर के, पड़ौस के लोगों से भी हमला सकता है। वो चाहते हैं कि आप फिर पुरानी लाइन पर आएँ ताकि आप नीचे आ जाएँ। वो यह नहीं कहेंगे कि तू अच्छा बन गया है। उलटा कहेंगे कि देवते छोड़ दिये । इलज़ाम बड़ा तगड़ा है। खुद खाने-पीने वाले, चोर ठग होंगे। भक्त भी नहीं होंगे वो । आज अधिकता भी शराबियों की है, इसलिए वो अच्छे को तंग करने लगते हैं । पहले किसी गाँव में एक शराबी होता था तो सब उसे बुरा-भला कहते थे। पहले एक चोर होता था तो सब गालियाँ देते थे उसे । अब चोरों ने भी अपनी तादाद बड़ा ली है । पहले कोई किसी लड़की को छेड़ता था तो सब थू-थू करते थे। अब इनकी तादाद भी ज़्यादा हो गयी है। उलटा युग आ गया, इसलिए तंग नहीं होना । चट्ठे की बात याद आ गयी। मैं रूपलाल के घर गया। वहाँ 3-4 लागों ने गाड़ी पर थूकना शुरू किया। आधा घंटा थूकते रहे, पर बाहर आने की हिम्मत न थी। एक नेक इंसान ऐसा काम कर सकता है क्या! मैंने रूपलाल से पूछा कि कौन हैं ये ? कहा कि यह सयाना है, लाखों रूपये मुझसे खाए हैं, पर ठीक न कर सका। जबसे आपके पास आया, ठीक हूँ। औरों को भी लाया हूँ ।