भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

पृष्ठ 247, कुल 264 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 247

नाम पीव का छाड़ि के, करे आन की आस ।

वेश्या तेरा पूतरा, क कौन को बाप ।।

पत्नी नाराज़ होकर चली जाए, ठीक है । मायके चली गयी। 1 महीना, 2 महीने, 6 महीने नहीं आए, कोई बात नहीं। पर यदि वो दूसरा ख़सम कर ले तो कैसा है! फिर तो पति छोड़ देता है, ख़बर भी नहीं लेता है। शरणागति में भी यही आता है ।

सुख में तुझे न भूलूँ, दुख में न हार मानूँ ।

ऐसा प्रभाव भर दे, मेरे अधीर मन में ।।

सुख-दुख कुछ भी हो, चिंता मत करो । एक माई चिन्नौर में 100-150 आदमी को नाम दिलाया। उसका अपना स्कूल भी है। बड़ी लग्न है कि साहिब की भक्ति में जोड़े। एक दिन परेशान होकर आई । हम परेशानी में शामिल हो जाते हैं। कहा कि स्कूल के पास पीपल का पेड़ है। किसी ने फैलाया कि वहाँ पेड़ के नीचे डायन रहती है; एक दिन किसी बच्चे का कलेजा निकालकर खा रही थी। दूसरे दिन 50 बच्चे भी नहीं आए। वजह तो साफ़ है न! बूढ़ी माइयाँ श्रद्धालु हैं; कोई कुछ भी कहे मान लेती हैं। कोई गुर्ज़ लेकर आए तो कहेंगी कि हनुमान जी आ गये हैं । क्योंकि वो सीधी हैं; स्कूल की शक्ल भी उन्होंने नहीं देखी है। तो किसी ने अपने लखां के लाल दौत्रू - पोनू को नहीं जाने दिया; कहा कि या तो मुक्ति कराओ यानी ढोल पिटवाओ सयाने से। अब उस माई के दो बेटे हैं, एक ने नाम लिया है, एक ने नहीं लिया है। वो कहने लगी कि लड़का कह रहा है कि हत्या मनानी है। मैंने कहा कि यदि हमारे बेड़े में सयाने ने ढोल पीटा तो सारा काम ख़राब हो जाएगा। क्योंकि मैंने बड़े लोगों को भक्ति में जोड़ा है। लोग कहेंगे कि यह खुद मान रही है। तो मैंने कहा कि लड़के को लाओ मेरे पास । मैंने लड़के को समझाया कि घर-घर जाकर लोगों को समझाओ। उसने कहा कि आप ठीक कह रहे हैं, पर दुनिया नहीं मानती है। तो उसने घर- घर जाकर समझाया। पर फिर भी 50-60 बच्चे कम पड़ ही गये । दुनिया कैसी है ? हमारा कोई बीमार भी पड़ जाए तो कहते हैं कि साहिब ने ठीक नहीं किया। मर जाए तो बात ही क्या करनी ! राजा दशरथ पुत्र के बनवास के शोक में इतने दुखी हुए कि रोते-रोते उनकी आँखें तक चली

करूँ जगत से न्यार · पृष्ठ 247, कुल 264 में से · BharatKosha