भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

पृष्ठ 251, कुल 264 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 251

अंकुरी जीव कौन हैं? कौन से जीव भटकते हैं ? जो भी हमसे दीक्षा लेगा, भटकेगा तो भी लाइन पर आ जायेगा । पर आपकी कोशिश होनी चाहिए कि अगला जन्म न लें। कहीं भी कुछ गड़बड़ होगी तो आपको संकेत मिलेंगे । आपको सुरक्षा भी पूरी-पूरी मिल रही है, फिर भटकना क्यों है ? माँ छोटे बच्चे का कितना ध्यान रखती है, खिलाने का, नहलाने का, दूध पिलाने का, सर्वांगीण सुरक्षा करती है। वो बड़ा ध्यान रखती है, पर वो कहीं पर चूक भी जाती है। लेकिन आपकी सुरक्षा करने वाली ताक़त चूकती नहीं है। चुपचाप आप अपने अंदर बदलाव देख लेना । अगर आप गलती करें, साहिब ने छोड़ दिया तो फिर निरंजन जीत गया। साहिब आपको छोड़ेगा नहीं, सुधारकर छोड़ेगा। यह नहीं कि मरो जाकर। फिर तो निरंजन की जीत ही हुई। जितना आप गुरु के सान्निध्य में रहेंगे, उतनी भूलें कम करोगे । क्या प्रभु तक हमारी पुकार जाती है ? एक ने मुझसे कहा कि पीड़ा होने पर जब हम प्रभु को पुकारते हैं तो क्या परमात्मा तक हमारी पुकार जाती है या फिर हम ऐसे ही अँधकार में भटक रहे हैं ? उसने कहा कि आपकी बातों को सुनकर अजीब-सा लग रहा है। मैंने कहा कि जो भी संसार के लोग पुकार करते हैं, वो निरंजन तक जाती है। शरीर के कष्ट छुटकारा पाने के लिए ही तो पुकार कर रहे हैं न। वो निरंजन से संबंधित है। आत्मा का शरीर से कोई सरोकार नहीं है। वो निरंजन सब चीजें दे देता है ताकि लगे कि प्रभु ने पुकार सुनी। पर वो आत्मा का ज्ञान नहीं देने वाला। भौतिक पदार्थ दे देगा। नचिकेता का वृत्तांत सुना होगा । उसका पिता राजा था। वो बूढ़ी गाय दान में दे रहा था। नचिकेता को ठीक नहीं लगा। उसने सोचा कि यह तो जाकर इनकी सेवा ही करेगा । दान में तो अच्छी चीज़ होनी चाहिए। उसने पिता से पूछा कि मुझे किसको दान में दोगे ? पिता ने उसकी बात अनसुनी कर दी। नचिकेता ने 2-3 बार पूछा, पर उसके पिता ने ध्यान नहीं दिया। पर जब वो बार-बार पूछने लगा कि मुझे किसे दान में दोगे तो उसके पिता ने कहा कि