भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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करत कलोल फिरत अंजियन संग |

आपन मरन उनहूँ न जाना॥

'अजा' बकरी को कहते हैं । 'कलौल' यानी खेलकूद। वो गड़रिये की बकरियों के साथ खेलता था। अपना भेद उसे मालूम नहीं था कि शेर हूँ । बड़ा हो गया। घास भी खाने लगा। घास क्यों खाने लगा ? आपके बच्चे भी कभी मिट्टी खाते हैं। बच्चों की जीभ इंद्री तेज़ होती है। मिट्टी में एक तत्व है। खाने की चीज़ नहीं थी । विषैले पदार्थ भी हैं। पर आदत पड़ गयी । मिट्टी खाना गंदी आदत है। आत्मा को इंद्रियों के साथ रहने की बड़ी गंदी आदत पड़ गयी है । मेरा भतीजा मिट्टी खाता था । उसकी माँ कहती थी कि यह मिट्टी खाता है । मैंने कहा कि घर में मिट्टी न रखा करो। बाद में वो कहने लगी कि यह बाहर जाकर मिट्टी खाता है। मैंने कहा कि बाहर न जाने दो। फिर एक दिन कहने लगी कि जूते के तलवे से मिट्टी निकालकर खाता है । देखा न, कितनी गंदी आदत थी ! मैंने कहा कि जूते ऊँची जगह पर रखा करो। फिर एक दिन कहने लगी कि अब दीवारों को चाटता है । अब दीवारें थोड़ा तोड़नी थीं । वाह ! ऐसा ही है मन।

तीन लोक में मनहिं विराजी । ताहिं न चीह्नत पंडित काजी ॥

तो उसे बाद में समझाया, भय दिया कि नहीं खाओ । मिट्टी खाने की चीज़ नहीं है । इस तरह शेर के लिए घास खाने की चीज़ नहीं है। एक भैंस का कट्टा है। भैंस को चारा देने जाऊँ तो वो मेरे पैर की टो पकड़कर नौचता है। उसने दोनों टो खा ली हैं। भूखा होता है तो कुछ खाना चाहता है। वो खाने की चीज़ नहीं है; पर भूखा था । संभवतः, शेर का बच्चा भी घास खाना इसलिए सीख गया होगा, क्योंकि उसे कुछ और न मिला होगा। उसने देखा होगा कि बाकी भी यही खा रहे हैं। वो भी खाने लग गया। वो लड़ाई भी भेड़ की तरह ही करने लग गया। बोलने भी भेड़ की तरह ही लगा । गरजने की जगह मिनमिनाने लगा। कुत्ता भौंकता है, हाथी चिंगाड़ता है, शेर गरजता है, बकरी मिनमिनाती है । वो मिनमिनाने लगा। शेर को मिनमिनाना नहीं है । पर वो भेड़ों को मिनमिनाते देखता था। पूरे काम बकरियों वाले करने लगा । चलना भी बकरियों की तरह