कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)
by महाकवि सोमदेव भट्ट
Source: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (origin)
DevanagariHindipublished876 pages
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- २८ - कथामुख नामक द्वितीय लम्बक १११-२३७ प्रथम तरंग १११-१३१ राजा सहस्रानीक की कथा १११ रानी मृगावती के विवाह की कथा १२१ उदयन के जन्म की कथा १२७। द्वितीय तरंग १३१-१६१ धीवर और मृगांकवती की कथा १३३। तृतीय तरंग १६१-१७१ राजा उदयन की कथा १६१ राजा चण्ड महासेन की कथा १६५। चतुर्थ तरंग १७१-१९९ वत्सराज उदयन की कथा (क्रमशः) १७१ लोहजंघ की कथा १८४। पंचम तरंग १९९-२२५ उदयन की कथा वासवदत्ता हरण १९९ गुहसेन और देवस्मिता की कथा २०५ सिद्धि की कथा २११ सेठ समुद्रदत्त और शक्तिमती की कथा २२१ समुद्रदत्त की कथा (क्रमशः) २२१। षष्ठ तरंग २२५-२३७ वत्सराज की कथा २२५ याज्ञ विनष्टक की कथा २३१ वज्र और प्रभावती की कथा २३५। लावानक नामक तृतीय लम्बक २३९-४ ० प्रथम तरंग २३९-२६१ वत्सराज उदयन की कथा (क्रमशः) २३९ निपुण वैद्य की कथा २४१ मूर्ख साधु की कथा २४३ राजा देवसेन और उन्मादिनी की कथा २४७ यज्ञस्वक सेठ की कथा २५१ राजा पुण्यसेन की कथा २५३ सुन्द और उपसुन्द की कथा २५७। द्वितीय तरंग २६१-२७७ राजा उदयन और पद्मावती के विवाह की कथा २६१ वासवदत्ता के जलने की कथा २६१ कुन्ती और दुर्वासा की कथा २६५ पद्मावती का विवाह २६९। तृतीय तरंग २७७-३ १ वत्सराज की कथा (चालू) २७७ विहितसेन और तेजोवती की कथा २८१ सोमप्रभा और गुहसेन की कथा २८५ इन्द्र और अहल्या की कथा २९५। चतुर्थ तरंग ३ १-३५७ वत्सराज का कौशाम्बी में पुनरागमन ३ १ ग्वालों की कथा ३ ५ वत्सराज को खजाना और सिंहासन की प्राप्ति ३ ७ वत्सराज का दिग्विजय के लिए विचार ३ ९ वीर विदूषक ब्राह्मण की कथा ३११। पंचम तरंग ३५७-३७५ वत्सराज के द्वारा शिव की आराधना ३५७ देवदास वैश्य की कथा ३५९ वत्सराज का दिग्विजय के लिए प्रयाण ३६५ वत्सराज के दिग्विजय की कथा ३६९।