भारतकोश
कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा

स्रोत: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (उद्गम)

DevanagariHindipublished876 पृष्ठ

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तृतीय लम्बक ४०१ यह सारा समाचार मेरे पिता के देश में प्रसिद्ध है। मैं भी उसी कालरात्रि की शिष्या हूँ यह मैंने पहले ही कहा था किन्तु पतिव्रता होने के कारण मेरी सिद्धि उससे भी बढ़ी-चढ़ी है॥१८४-१८८॥ तुम्हारे कल्याण के लिए ही पूजन करते हुए तुमने मुझे आज देख लिया है। मैं बलि देने के लिए उपयुक्त मनुष्य को आकृष्ट करने के लिए तैयार थी॥१८९॥ इसलिए तुम्हीं हमारे सम्प्रदाय में अब प्रवेश करो—आ जाओ। सिद्धियों के प्रभाव से जीते हुए राजाओं के सिर पर पैर रखो॥१९०॥ डाकिनी के मत में आकर कहाँ महामांस का भोजन और कहाँ मैं राजा! यह सम्भव नहीं है—ऐसा कहकर राजा ने निषेध कर दिया॥१९१॥ जब रानी प्राण-त्याग करने के लिए तैयार हो गई, तब राजा ने विवश होकर डाकिनी के मत में जाने की स्वीकृति दे दी। विषयी लोग सुपथ में कैसे रह सकते हैं? ॥१९२॥ तब प्रसन्न रानी ने पहले ही पूजा किये हुए मण्डल में राजा को बुला लिया और बोली—'यह जो तुम्हारे पास फलभूति नाम का ब्राह्मण है, उसे ही मैंने बलिदान के लिए आकृष्ट करने का निश्चय किया था। किन्तु आकृष्ट करने में अत्यन्त परिश्रम होता है, इसलिए अच्छा हो कि तुम रसोइयों में से किसी एक को अपने मत में मिलाओ जो स्वयं मारे भी और पकावे भी॥१९३-१९५॥ तुम्हें उस मांस-भक्षण से घृणा नहीं करनी चाहिए, पूजा समाप्त होने पर सिद्धि अवश्य होगी क्योंकि सफलता ही सर्वोत्तम है॥१९६॥ प्यारी पत्नी से इस प्रकार बाधित राजा ने पाप से डरते हुए भी उसकी बात मान ली। सच है स्त्रियों के प्रति अनुरोध होना दुःसह होता है॥१९७॥ तब राजा ने साहसिक नामक रसोइये को बुलाकर और विश्वास दिलाकर तथा अपने मत में दीक्षित करके (चेला बनाकर) राजा और रानी दोनों ने उससे साथ ही कहा—॥१९८॥ 'आज राजा रानी के साथ भोजन करेंगे इसलिए जल्दी भोजन तैयार करो'—इस प्रकार का सन्देश जो भी व्यक्ति तुम्हारे पास आकर कहे, उसे तुम मार डालना और उसके मांस से प्रातःकाल एकान्त में हम दोनों के लिए तुम स्वादिष्ट भोजन बनाना। इस प्रकार आज्ञा पाकर रसोइया 'ठीक है'—ऐसा कहकर अपने घर चला गया॥१९९-२००॥ तदनन्तर समीप आये हुए राजा ने फलभूति से कहा कि 'जाओ! साहसिक नामक रसोइये से रसोईघर में जाकर कह दो कि आज राजा रानी के साथ स्वादिष्ट भोजन करेंगे इसलिए शीघ्र ही अच्छा स्वादिष्ट भोजन बनाओ'॥२०१-२०२॥ ५१

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