भारतकोश
कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा

स्रोत: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (उद्गम)

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पृष्ठ 390, कुल 1079 में से

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द्वादश लम्बक १६१ तदनन्तर, प्रलम्ब को मरा हुआ देखकर मोहन नामक राजा ने सामने आकर अट्टहास को बाणों की वर्षा से छा दिया ॥६१॥ अट्टहास ने धनुष काटकर और सारथी को मारकर दृढ़ प्रहारों द्वारा मोहन नामक राजा को भी गिरा दिया ॥६२॥ रण-चतुर अट्टहास द्वारा चार वीरों के मारे जाने पर श्रुतशर्मा की सेना विजय मनाती हुई हर्ष से कोलाहल करने लगी ॥६३॥ यह देखकर हर्य नामक क्रुद्ध सूर्यप्रभ के मित्र ने अपनी सेना के साथ अट्टहास का सामना किया। अपने बाणों से उसके बाणों को हटाकर दो बाणों से उसके सारथी और तीन से उसके धनुष और ध्वजा को काट दिया ॥६४-६५॥ उसके पश्चात् हर्य ने बाणों से अट्टहास का सिर काट डाला जिससे रक्त उगलता हुआ अट्टहास रथ से भूमि पर गिर पड़ा ॥६६॥ अट्टहास के मरते ही ऐसा घमासान युद्ध मचा कि क्षण-भर में ही दोनों ओर की सेना आधी आधी रह गई ॥६७॥ सारी रणभूमि में हाथी घोड़े और पैदल सैनिक कटकर मर रहे थे। केवल सिरों से हीन धड़ ही धड़ खड़े दीख रहे थे ॥६८॥ तब अट्टहास की मृत्यु से क्रुद्ध हुआ विकृतदंष्ट्र नामक विद्याधरराज ने सामने आकर हर्य को बाणों से घेर लिया ॥६९॥ हर्य ने भी उसके बाणों का जाल काटकर उसकी ध्वजा और सारथी को भी काटा और उसके घोड़ों को मारकर सुन्दर कुंडलवाले उसके सिर को भी काट डाला ॥७०॥ विकृतदंष्ट्र के मारे जाने के कारण चक्रवाल नामक विद्याधर-राजा क्रोध से हर्य के प्रति दौड़ा ॥७१॥ चक्रवाल ने भी बार-बार हर्य के धनुष को काटा और दूसरे शस्त्र को उठाने के पहले ही उसने थके हुए हर्य को मार दिया ॥७२॥ यह देखकर प्रभास नामक राजा ने चक्रवाल को ललकारा किन्तु चक्रवाल ने सामने आये हुए चार मुख्य राजाओं को क्रमशः मार डाला ॥७३-७४॥ जिनके नाम थे कंकट, विशाल प्रचंड और अंगुरी। यह देखकर निर्घात नाम का राजा क्रोध से चक्रवाल पर टूट पड़ा ॥७५॥

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