भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 361 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 9

( ५ ) कं. सूत्र पृष्ठ श्चित्त करे । किसी का सन्देश ले जाकर न कहने पर प्रायश्चित, बड़े भाई के रहते छोटे भाई का ब्याह न करे । पर शान्ति । बच्चे के ऊपर के दो बड़े दाँत निकलने पर शान्ति । ४६-५५ सब प्रकार की शान्तियों का वर्णन । ११०-११५ अध्याय ॥ ६ ॥ ४७-५७ अभिचार की पद्धति । ११५-१२४ ५०-२२ स्वस्त्ययन कर्म । जङ्गल में जाते समय मार्ग में बाघ, १२५-१२८ चोर, हुड़ाल, चरक, सिंह, बनैले हिंसक जानवरों से भय का निवारण । अध्याय ॥ ७ ॥ ५१-२२ गोशाला के कल्याणार्थ गोष्ठकर्म । खेत के नाश करनेवाले १२८-१३० मूसा, पतङ्ग, टिड्डी, हरिण, रुरु आदि । ५२-२१ कारागार से बन्धुओं को छुड़ना । जले अङ्गवाले को अभि- १३०-१३२ मंत्रित जल से धोवे । अग्नि के उत्पात