कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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हेममणिचित्रा रत्नावली । हेममणिमुक्तान्तरोऽपवर्तकः । सुवर्णसूत्रान्तरं सोपानकम् । मणिमध्यं वा मणिसोपानकम् ।
(१) तेन शिरोहस्तपादकटीकलापजालकविकल्पा व्याख्याताः ।
(२) मणिः कौटो मालेयकः पारसमुद्रकश्च ।
(३) सौगन्धिकः पद्मरागः अनवद्यरागः पारिजातपुष्पकः बालसूर्य्यकः ।
(४) वैदूर्य्यः—उत्पलवर्णः शिरीषपुष्पक उदकवर्णो वंशरागः, शुकपत्रवर्णः पुष्यरागो गोमूत्रको गोमेदकः ।
(५) नीलावल्रीय इन्द्रनीलः कलायपुष्पको महानीलो जाम्बवाभो जीमूतप्रभो नन्दकः स्रवन्मध्यः ।
यष्टि कहा जाता है। सोने के दाने और मणियों से पिरोई गई मोती की माला रत्नावली कहलाती है। यदि किसी माला में सोने के दाने, मणि और मोती क्रमशः पिरो दिये गये हैं तो उस माला को अपवर्तक कहते हैं। यदि अपवर्तक माला में मणि न लगी हो तो उसका नाम सोपानक है। यदि बीच में मणि लगा दी जाय तो उसे मणिसोपानक कहते हैं।
(१) इसी प्रकार शिर, हाथ, पैर और कमर की भिन्न-भिन्न मालाओं के सम्बन्ध में भी समझ लेना चाहिए।
(२) मणियों के तीन उत्पत्ति-स्थान हैं : १. कौट (मलयसागर के समीप कोटि नामक स्थान में उत्पन्न) २. मालेयक (मलय देश के कर्णीवन नामक पर्वत में उत्पन्न) और ३. पारसमुद्रक (समुद्र पार सिंहल आदि स्थानों में उत्पन्न)।
(३) मणियों में पाँच प्रकार के मणिक्य होते हैं : १. सौगन्धिक (सायंकाल खिलने वाले सौगन्धिक नामक नीलवर्णयुक्त कमल के समान), २. पद्मराग (पद्म नामक कमल के समान), ३. अनवद्यराग (केशर के समान); ४. पारिजात पुष्पक (हरसिंगार पुष्प के समान) और ५. बालसूर्य्यक (उदय होते सूर्य के समान)।
(४) वैदूर्य मणि आठ प्रकार की होती है : १. उत्पलवर्ण (लाल कमल के समान) २. शिरीषपुष्पक (शिरीष पुष्प की भाँति), ३. उदकवर्ण (जल के समान), ४. वंशराग (बाँस के पत्ते के समान), ५. शुकपत्रवर्ण (तोते के पंख की तरह), ६. पुष्यराग (हल्दी के समान), ७. गोमूत्रक (गोमूत्र के समान) और ८. गोमेदक (गोरोचन के समान)।
(५) इन्द्रनीलमणि भी आठ प्रकार की होती है : १. नीलाबलीय (नीली धारियों वाली), २. इन्द्रनील (मोरपंख के समान), ३. कलायपुष्पक (मटर पुष्प के समान), ४. महानील (गहरे काले रंग की), ५. जाम्बवाभ (जामुन के समान), ६. जीमूतप्रभ (मेघ के समान), ७. नन्दक (भीतर से श्वेत तथा बाहर से नीली) और ८. स्रवन्मध्य (जलप्रवाह के समान तरलित किरणों वाली)।