कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला
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Read in context| प्रकरण ७४ | ## साहसम् |
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| अध्याय १७ |
(१) साहसमन्वयवत्प्रसभकर्म । निरन्वये स्तेयमपव्ययने च । (२) रत्नसारफल्गुकुप्यानां साहसे मूल्यसमो दण्डः, इति मानवाः । मूल्यद्विगुण इत्यौशनसाः । यथापराध इति कौटिल्यः । (३) पुष्पफलशाकमूलकन्दपक्वान्नचर्मवेणुमृद्भाण्डादीनां क्षुद्रकद्रव्याणां द्वादशपणावरश्चतुर्विंशतिपणपरो दण्डः । (४) कालायसकाष्ठरज्जुद्रव्यक्षुद्रपशुपटादीनां स्थूलकद्रव्याणां चतुर्विंशतिपणावरोऽष्टचत्वारिंशत्पणपरो दण्डः । ताम्रवृत्तकंसकाचदन्तभाण्डादीनां स्थूलकद्रव्याणामष्टचत्वारिंशत्पणावरः षण्णवतिपरः पूर्वः साहसदण्डः । महापशुमनुष्यक्षेत्रगृहहिरण्यसुवर्णसूक्ष्मवस्त्रादीनां स्थूलकद्रव्याणां द्विशतावरः पञ्चशतपरः मध्यमः साहसदण्डः ।
साहस
( १ ) खुले आम बलात्कार करना, डाके डालना तथा मारधाड़ करना साहस कहलाता है । छिपकर किसी वस्तु का अपहरण करना या किसी वस्तु को लेकर देने से मुकर जाना चोरी कहलाता है ।
( २ ) मनु के मतानुयायी विद्वानों का कथन है कि 'रत्न, बहुमूल्य टिकाऊ वस्तुओं, रसहीन वस्तुओं तथा ताँबा आदि धातुओं पर डाका डालने वाले व्यक्ति को, उनकी कीमत के बराबर दण्ड दिया जाय' । औशनस संप्रदाय के विद्वानों की राय है कि मूल्य के बराबर नहीं 'मूल्य से दुगुना दण्ड दिया जाय ।' किन्तु आचार्य कौटिल्य का अभिमत है कि उन्हें 'अपराध के अनुसार ही दंड दिया जाय ।'
( ३ ) फूल, फल, शाक, मूल, कंद, पका अन्न, चमड़ा, बाँस और मिट्टी के बर्तन आदि छोटी-छोटी वस्तुओं का अपहरण करने वाले पर बारह पण से लेकर चौबीस पण तक का दंड किया जाय ।
( ४ ) इसी प्रकार लोहा, लकड़ी, रस्सी, छोटे पशु और वस्त्र आदि वस्तुओं के अपहरण में चौबीस से अड़तालीस पण तक का दण्ड किया जाय । तांबा, पीतल, कांसा, कांच और हाथीदांत आदि की बनी हुई वस्तुओं पर डाका डालने वाले पर