कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
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॥ श्रीः ॥
कौटिलीयम्
अर्थशास्त्रम्
ॐ
नमः शुक्रबृहस्पतिभ्याम् । (१) पृथिव्या लाभे पालने च यावन्त्यर्थशास्त्राणि पूर्वाचार्यैः प्रस्था- पितानि प्रायशस्तानि संहृत्यैकमिदमर्थशास्त्रं कृतम् । (२) तस्यायं प्रकरणाधिकरणसमुद्देशः ।
कौटिल्य का
अर्थशास्त्र
ॐ
शुक्राचार्य और बृहस्पति के लिए नमस्कार है ।
( १ ) पृथिवी की प्राप्ति और उसकी रक्षा के लिए पुरातन आचार्यों ने जितने भी अर्थशास्त्र-विषयक ग्रन्थों का निर्माण किया उन सबका सार-संकलन कर प्रस्तुत अर्थशास्त्र की रचना की गई है ।
( २ ) इस अर्थशास्त्र के प्रकरणों और अधिकरणों का निरूपण इस प्रकार है :