भारतकोश
केनोपनिषद् (पदभाष्य व वाक्यभाष्य सहित)

केनोपनिषद् (पदभाष्य व वाक्यभाष्य सहित)

Kena Upanishad with Pada & Vakya Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished152 पृष्ठ

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१४ केनोपनिषद् [ खण्ड १ प्रेरकविषयक प्रश्न ॐ केनेषितं पतति प्रेषितं मनः । केन प्राणः प्रथमः प्रैति युक्तः । केनेषितां वाचमिमां वदन्ति चक्षुः श्रोत्रं क उ देवो युनक्ति ॥ १ ॥ यह मन किसके द्वारा इच्छित और प्रेरित होकर अपने विषयोंमें गिरता है ? किससे प्रयुक्त होकर प्रथम ( प्रधान ) प्राण चलता है ? प्राणी किसके द्वारा इच्छा की हुई यह वाणी बोलते हैं ? और कौन देव चक्षु तथा श्रोत्रको प्रेरित करता है ? ॥ १ ॥ पद-भाष्य केन इषितं केन कर्त्रा इषितम् | केन इषितम्—किस कर्ताके | द्वारा इच्छित अर्थात् अभिप्रेत हुआ इष्टमभिप्रेतं सत् मनः पतति | मन अपने विषयकी ओर जाता वाक्य-भाष्य तन्नासति चेतनावत्यधिष्ठातरि | प्रवृत्त हो रही हैं उनकी प्रवृत्ति बिना | किसी चेतन अधिष्ठाताके बन नहीं उपपद्यते । तद्विशेषस्य चानधि- | सकती । इस प्रकार सामान्य चेतनका गमाच्चेतनावत्सामान्ये चाधिगते | ज्ञान होनेपर भी उसके विशेष रूपका | ज्ञान न होनेके कारण यह विशेष-विषयक विशेषार्थः प्रश्न उपपद्यते । | प्रश्न उचित ही है । केनेषितम् केनेष्टं कस्येच्छा- | केन इषितम्—किससे इच्छा किया | हुआ अर्थात् किसकी इच्छामात्रसे मन मात्रेण मनः पतति गच्छति | अपने विषयोंकी ओर गिरता अर्थात् | जाता है ? यानी वह किसकी इच्छासे स्वविषये नियमेन व्याप्रियत | अपने विषयमें नियमानुसार व्यापार इत्यर्थः । मनुतेऽनेनेति विज्ञान- | करता है ? जिससे मनन करते हैं वह निमित्तमन्तःकरणं मनः प्रेषितम् | विज्ञाननिमित्तक अन्तःकरण मन है । | यहाँ 'किसके द्वारा प्रेषित हुआ-सा'— इवेत्युपमार्थः । न त्विषित- | ऐसा उपमापरक अर्थ लेना चाहिये ।