केनोपनिषद् (पदभाष्य व वाक्यभाष्य सहित)
Kena Upanishad with Pada & Vakya Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंश्रीहरिः विषय-सूची —***— विषय पृष्ठ १. शान्तिपाठ ... ... १ प्रथम खण्ड २. सम्बन्ध-भाष्य ... ... २ ३. प्रेरकविषयक प्रश्न ... ... १४ ४. आत्माका सर्वनियन्तृत्व ... ... २० ५. आत्माका अज्ञेयत्व और अनिर्वचनीयत्व ... ... ३१ ६. ब्रह्म वागादिसे अतीत और अनुपास्य है ... ... ४५ द्वितीय खण्ड ७. ब्रह्मज्ञानकी अनिर्वचनीयता ... ... ५४ ८. अनुभूतिका उल्लेख ... ... ६३ ९. ज्ञाता अज्ञ है और अज्ञ ज्ञानी है ... ... ६८ १०. विज्ञानावभासोंमें ब्रह्मकी अनुभूति ... ... ७३ ११. आत्मज्ञान हीं सार है ... ... ८४ तृतीय खण्ड यक्षोपाख्यान ... ... ८७ १२. देवताओंका गर्व ... ... १०४ १३. यक्षका प्रादुर्भाव ... ... १०५ १४. अग्निकी परीक्षा ... ... १०९ १५. वायुकी परीक्षा ... ... ११२ १६. इन्द्रकी निवृत्ति ... ... ११४ १७. उमाका प्रादुर्भाव ... ... ११५