भारतकोश
खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

महाकवि श्रीहर्ष द्वारा

DevanagariHindipublished610 पृष्ठ

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पृष्ठ 486

४६६ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ चतुर्थ तयैव संविदा भासमानत्वमिति चेन्न । भासमानत्वस्यैव निरूप्यमाणत्वात्, तन्निरूप्यत्वात्तद्रूच्वस्य । यस्यां संविदि प्रकाशमानायां यः प्रकाशत एवेति चेन्न । प्रकाशमानताया एव निरूप्यमाणत्वात् । सामान्यतो विषयत्वे सिद्धे विशेषतो विषयत्वाभिधानमिति चेन्न । सर्वथा विशेषानुपपत्तिद्वारा सामान्यानुपपत्तौ तद्विषयप्रमात्वस्यापि सन्दिग्धत्वात् । ज्ञानाकारार्पणक्षमो हेतुरेव विषय इति चेन्न । आकार एव केनार्पित इति से संविद् ही विषय और घटादि ही विषयी क्यों न कहे जाएँ ? तृतीय पक्ष में संविद् के कारण चक्षु आदि भी संविद् के सम्बन्धी हैं तथा वे अन्य ज्ञान से प्रकाशित भी होते हैं; अतः उनमें अतिव्याप्ति हो जायगी । समर्थन—'जो जिस संविद् के सम्बन्धी हों तथा उसी संविद् से भासमान हों, वे उस संविद् के विषय हैं' ऐसा कहेंगे । ज्ञान के कारण चक्षुरादि ज्ञानसंबंधी और भास- मान होने पर भी उसी ज्ञान से भासमान नहीं होते, अतः उनमें अतिव्याप्ति नहीं होगी। खण्डन—भासमानत्व विषयत्व का लक्षण है ही। यदि उसमें भी भासमानत्व का प्रवेश करें, तो आत्माश्रय हो जायगा । समर्थन—'जिस¹ संविद् के प्रकाशित होने पर जो वस्तु प्रकाशित हो, वह उस संविद् की विषय है', ऐसा लक्षण करेंगे। खण्डन—प्रकाशविषयता ही प्रकाशमानता है। एवञ्च विषयत्व का अद्यापि निरूपण न होने से प्रकाशमानता ही असिद्ध हैं, अर्थात् आत्माश्रय है । समर्थन—सामान्यरूप से विषयत्व तो सिद्ध ही है। यह लक्षण विशेषरूप से विषयत्व के ज्ञान के लिए है, अतः आत्माश्रय नहीं होगा। खंडन—सामान्य निर्विशेष नहीं होता । एवञ्च एक भी विशेष का ज्ञान न होने से सामान्य के सत्त्व में संदेह होगा, जिससे सामान्यविषयक ज्ञान का प्रमात्व भी सन्दिग्ध ही है । समर्थन—'ज्ञान² में घटाद्याकारों का जो अर्पण है, उसका हेतु विषय है' ऐसा लक्षण करेंगे । खण्डन—ज्ञान में आकार किसके द्वारा अर्पित होता है, इसका ज्ञान ही अशक्य १. 'विषयनिरूप्यं हि ज्ञानम्, अतो ज्ञानवित्तिवेद्यो विषयः' इस नियम के अनुसार कहा गया है । २. यह बाह्यार्थवादी बौद्ध का लक्षण है ।