भारतकोश
कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Kularnava Tantra with Hindi Commentary

भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ

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साधनमाला १७ क्षं वातपित्तश्लेष्माख्यदोषत्रयरूपायै विद्यात्मिकायै पञ्चभूत- व्यापिकाधीश्वर्यै नमः हृदयादिभ्रूयुगान्तं। अं...क्षं मूलं सकलप्रपञ्चरूपायै पराम्बा देव्यै नमः सर्वाङ्गे व्यापकं॥ भुवनन्यास निम्नलिखित प्रत्येक मन्त्र के आदि में 'ऐं ह्रीं श्रीं ह्सौः' जोड़कर न्यास करे। यथा— अं आं इं अतललोकनिलयशतकोटिगुह्याख्ययोगिनीदेवता- युताधारशक्त्यम्बादेव्यै नमः पादयो.। ईं उं ऊं वितललोक- निलयशतकोट्यतिगुह्ययोगिनी-मूलदेवतायुतानन्दशक्त्यम्बादेव्यै नमः गुल्फयोः। ऋं ॠं लूं सुतललोकनिलयशतकोट्यतिगुह्य- योगिनीमूलदेवतायुताचिन्मयशक्त्यम्बादेव्यै नमः जंघयोः। लूँ एं ऐं महातललोकनिलयशतकोटिमहागुह्याख्ययो गनीमूलदेवता- युतस्वातंत्र्यशक्त्यंबादेव्यै नमः जान्वोः। ओं औं तलातललोक- निलयशतकोटिरहस्ययोगिनीमूलदेवतायुतपरमगुह्येच्छाशक्त्यम्बा देव्यै नमः ऊर्वोः। अं अः रसातललोकनिलयशतकोटिरहस्ययो- गिनीमूलदेवतायुतज्ञानशक्त्यम्बादेव्यै नमः गुह्ये। कं-५ पाताल- लोकनिलयशतकोटि-रहस्यातिरहस्ययोगिनी मूलदेवता-युतक्रियाश- क्त्यम्बादेव्यै नमः मूलाधारे। चं-५ भूर्लोकनिलयशतकोट्यतिर- हस्ययोगिनीमूलदेवतायुतश्रीडाकिनीशक्त्यम्बादेव्यै नमः स्वाधि- ष्ठाने। टं-५ भुवर्लोकनिलयशतकोटिमहारहस्ययोगिनीमूलदेवता- युतश्रीराकिणीशक्त्यम्बादेव्यै नमः नाभौ। तं-५ स्वर्लोकनिलय- शतकोटिपरमरहस्ययोगिनीमूलदेवतायुतलाकिनीशक्त्यम्बादेव्यै- नमः हृदये। पं-५ महर्लोकनिलयशतकोटिगुप्तयोगिनीमूलदेवता- युतश्रीकाकिनीशक्त्यम्बादेव्यै नमः तालुमूले। यं-४ जनलोकनिल- यशतकोटिगुप्ततरयोगिनी-मूलदेवतायुत-श्रीशाकिनीशक्त्यम्बादेव्यै फा २