भारतकोश
कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Kularnava Tantra with Hindi Commentary

भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ

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𑁍 विषय-प्रवेश 𑁍 १ भूमिका .... क २ पहला उल्लास—जीव की स्थिति .... १ ३ दूसरा उल्लास—कुलधर्म का माहात्म्य .... ४ ४ तीसरा उल्लास—ऊर्ध्वाम्नाय और प्रासाद-परामन्त्र की महिमा .... ६ ५ चौथा उल्लास—श्री प्रासादपरामन्त्र एवं महाषोढा .... १० ६ पाँचवाँ उल्लास—आधार, पात्र और कुलद्रव्य .... २५ ७ छठा उल्लास—पूजा-रहस्य और द्रव्य-संस्कार .... २८ ८ सातवाँ उल्लास—बटुक और शक्ति पूजन .... ३३ ६ आठवाँ उल्लास—उल्लास एवं पाठ-भेद .... ३८ १० नवाँ उल्लास—योग-योगीश-लक्षण और कौलपूजा.... ४३ ११ दसवाँ उल्लास—विशेष दिवसों के पूजन .... ४७ १२ ग्यारहवाँ उल्लास—कुलाचार-कथन .... ५२ १३ बारहवाँ उल्लास—पादुका-कथन .... ५५ १४ तेरहवाँ उल्लास—गुरु-शिष्य-लक्षण .... ५७ १५ चौदहवाँ उल्लास—गुरु-शिष्य-परीक्षा .... ५६ १६ पन्द्रहवाँ उल्लास—पुरश्चरण-कथन .... ६२ १७ सोलहवाँ उल्लास—काम्यकर्म का विधान .... ६६ १८ सत्रहवाँ उल्लास—गुरुनामादि की भावना .... ६६ 🙤 ❀ 🙦