संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished506 पृष्ठ
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| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| ब्रह्मचारी-धर्मका उपसंहार........................ | ३०९ | रखना आवश्यक .................................... | ३८० | ||
| १५- | गृहस्थधर्म तथा गृहस्थके सदाचारका वर्णन, धर्माचरण एवं सत्यधर्मकी महिमा ........ | ३१८ | २५- | गृहस्थ ब्राह्मणकी मुख्य वृत्ति तथा आपत्कालकी वृत्ति, गृहस्थके साधक तथा असाधक दो भेद, न्यायोपार्जित धनका विभाग एवं उसका उपयोग ..................................... | ३८२ |
| १६- | सदाचारका वर्णन................................. | ३२३ | |||
| १७- | भक्ष्य एवं अभक्ष्य-पदार्थोंका वर्णन ........... | ३३२ | |||
| १८- | गृहस्थके नित्यकर्मोंका वर्णन, प्रातःस्नानकी महिमा, छः प्रकारके स्नान, संध्योपासनकी महिमा तथा संध्योपासनविधि, सूर्योपस्थानका माहात्म्य, सूर्यहृदयस्तोत्र, अग्निहोत्रकी विधि, तर्पणकी विधि, नित्य किये जानेवाले पञ्च-महायज्ञोंकी महिमा तथा उनका विधान... | ३३७ | २६- | दानधर्मका निरूपण एवं नित्य, नैमित्तिक, काम्य तथा विमल-चतुर्विध दान-भेद, दानके अधिकारी तथा अनधिकारी, कामना-भेदसे विविध देवताओंकी आराधनाका विधान, ब्राह्मणकी महिमा तथा दानधर्म-प्रकरणका उपसंहार ............................................. | ३८५ |
| २७- | वानप्रस्थ-आश्रम तथा वानप्रस्थ-धर्मका वर्णन, वानप्रस्थीके कर्तव्योंका निरूपण ........... | ३९२ | |||
| १९- | भोजन-विधि, ग्रहणकालमें भोजनका निषेध, शयन-विधि, गृहस्थके नित्यकर्मोंके अनुष्ठानका महत्त्व .................................. | ३४८ | २८- | संन्यासधर्मका प्रतिपादन, संन्यासियोंके भेद तथा संन्यासीके कर्तव्योंका वर्णन.......... | ३९५ |
| २०- | श्राद्ध-प्रकरण—श्राद्धके प्रशस्त दिन, विभिन्न तिथियों, नक्षत्रों और वारोंमें किये जानेवाले श्राद्धोंका विभिन्न फल, श्राद्धके आठ भेद, श्राद्धके लिये प्रशस्त स्थान, श्राद्धमें विहित तथा निषिद्ध पदार्थ ................................. | ३५१ | २९- | संन्यासाश्रमधर्म-निरूपणमें यतियोंकी भैक्ष्य-वृत्तिका स्वरूप, यतियोंके लिये महेश्वरके ध्यानका प्रतिपादन, व्रतभङ्गमें प्रायश्चित्तविधान तथा पुनः यथास्थितिमें आनेकी विधि, संन्यासधर्म-प्रकरणकी समाप्ति ............... | ३९८ |
| २१- | श्राद्ध-प्रकरणमें निमन्त्रणके योग्य पंक्तिपावन ब्राह्मणों तथा त्याज्य पंक्ति-दूषकोंके लक्षण | ३५५ | ३०- | प्रायश्चित्त-प्रकरणमें प्रायश्चित्तका स्वरूप-निरूपण, पाँच महापातकोंके नाम तथा ब्रह्महत्याके प्रायश्चित्तका संक्षिप्त निरूपण.. | ४०२ |
| २२- | श्राद्ध-प्रकरणमें ब्राह्मण निमन्त्रित करनेकी विधि, निमन्त्रित ब्राह्मणके कर्तव्य, श्राद्ध-विधि, श्राद्धमें प्रशस्त पात्र, पितरोंकी प्रार्थना, श्राद्धके दिन निषिद्ध कर्म, वृद्धिश्राद्धका विधान, श्राद्ध-प्रकरणका उपसंहार ........ | ३६१ | ३१- | प्रायश्चित्त-प्रकरणमें कपालमोचन-तीर्थका आख्यान .............................................. | ४०५ |
| २३- | आशौच-प्रकरणमें जननाशौच और मरणाशौचकी क्रिया-विधि, शुद्धि-विधान, सपिण्डता, सद्यःशौच, अन्त्येष्टि-संस्कार, सपिण्डीकरण-विधि, मासिक तथा सांवत्सरिक श्राद्ध आदिका वर्णन ....................................... | ३७१ | ३२- | प्रायश्चित्त-प्रकरणमें महापातकोंके प्रायश्चित्तका विधान तथा अन्य उपपातकोंसे शुद्धिका उपाय .................................................. | ४१४ |
| २४- | अग्निहोत्रका माहात्म्य, अग्निहोत्रीके कर्तव्य, श्रौत एवं स्मार्तरूप द्विविध धर्म, तृतीय शिष्टाचारधर्म, वेद, धर्मशास्त्र और पुराणसे धर्मका ज्ञान तथा इनपर श्रद्धा | ३३- | प्रायश्चित्त-प्रकरणमें चोरी तथा अभक्ष्य-भक्षणका प्रायश्चित्त, प्रकीर्ण पापोंका प्रायश्चित्त, समस्त पापोंकी एकत्र मुक्तिके विविध उपाय, पतिव्रताको कोई पाप नहीं लगता, पतिव्रताके माहात्म्यमें देवी सीताका आख्यान, सीताद्वारा अग्निस्तुति, ज्ञानयोगकी प्रशंसा तथा प्रायश्चित्त-प्रकरणका उपसंहार ......... | ४१९ |