भारतकोश
संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण

Kurma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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अध्यायविषयपृष्ठ-संख्याअध्यायविषयपृष्ठ-संख्या
३४-तीर्थमाहात्म्य-प्रकरणमें प्रयाग, गया, एकास्र तथा पुष्कर आदि विविध तीर्थोंकी महिमाका वर्णन, सप्तसारस्वत-तीर्थके वर्णनमें शिवभक्त मङ्कणक मुनिका आख्यान ................४३२समीपवर्ती तीर्थोंकी महिमा, मार्कण्डेय तथा युधिष्ठिरके संवादकी समाप्ति .........४७१
३५-तीर्थमाहात्म्य-प्रकरणमें विविध तीर्थोंका माहात्म्य, कालञ्जर-तीर्थकी महिमाके वर्णनके प्रसंगमें शिवभक्त राजा श्वेतकी कथा .....४३८४१-तीर्थमाहात्म्य-प्रकरणमें नैमिषारण्य तथा जप्येश्वर-तीर्थकी महिमा, जप्येश्वर-तीर्थमें महर्षि शिलादके पुत्र नन्दीकी तपस्या तथा उनके गणाधिपति होनेका आख्यान ........४७४
३६-तीर्थमाहात्म्य-प्रकरणमें विविध तीर्थोंकी महिमा, देवदारु-वन-तीर्थका माहात्म्य .............४४१४२-विविध शैव-तीर्थोंके माहात्म्यका निरूपण, तीर्थोंके अधिकारी तथा तीर्थ-माहात्म्यका उपसंहार .............................................४७८
३७-देवदारु-वनमें स्थित मुनियोंका वृत्तान्त एवं शिवलिङ्गका पतन, मुनियोंको ब्रह्माका उपदेश, शिवको प्रसन्न करने-हेतु ऋषियोंद्वारा तपस्या तथा स्तुति, शिवद्वारा सांख्यका उपदेश .............................................४४६४३-चतुर्विध प्रलयका प्रतिपादन, नैमित्तिक प्रलयका विशेष वर्णन, विष्णुद्वारा अपने माहात्म्यका निरूपण ............................४८०
३८-तीर्थमाहात्म्य-प्रकरणमें मार्कण्डेय-युधिष्ठिर-संवादका प्रारम्भ, मार्कण्डेयजीद्वारा नर्मदा तथा अमरकण्टकतीर्थके माहात्म्यका प्रतिपादन.............................................४६०४४-प्राकृत प्रलयका वर्णन, शिवके विविध रूपों और विविध शक्तियोंका वर्णन, शिवकी आराधनाकी विधि, मुनियोंद्वारा कूर्मरूपधारी विष्णुकी स्तुति, कूर्मपुराणकी विषयानुक्रमणिकाका वर्णन, कूर्मपुराणकी फलश्रुति तथा इस पुराणकी वक्तृ-श्रोतृपरम्पराका प्रतिपादन, महर्षि व्यास तथा नारायणकी वन्दनाके साथ पुराणकी पूर्णताका कथन ......................४८५
३९-तीर्थमाहात्म्य-वर्णनके प्रसंगमें नर्मदाके तटवर्ती तीर्थोंका विस्तारसे वर्णन .....................४६३
४०-तीर्थमाहात्म्य-प्रकरणमें नर्मदा तथा उसके