संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished506 पृष्ठ
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| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
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| लिङ्गका पूजन तथा वहाँ रहते हुए शिवाराधना, एक दिन भिक्षा न मिलनेपर क्रोधाविष्ट व्यासजीका वाराणसीके निवासियोंको शाप देनेके लिये उद्यत होना, उसी समय देवी पार्वतीका प्रकट होना, देवीका व्यासको वाराणसी त्यागनेकी आज्ञा, पुनः स्तुतिसे प्रसन्न देवीके द्वारा चतुर्दशी तथा अष्टमीको वहाँ (वाराणसीमें) रहनेकी अनुमति देना | १९९ | नाड़ियोंका वर्णन तथा उनका कार्य, बारह महीनोंके बारह सूर्योंके नाम तथा छः ऋतुओंमें उनका वर्ण, आठ ग्रहोंका वर्णन, सोमके रथका वर्णन, देवोंद्वारा चन्द्रकलाओंका पान करना, पितरोंद्वारा अमावस्याको चन्द्रमाकी कलाका पान, बुध आदि ग्रहोंके रथका वर्णन ................................... | २२१ | ||
| ३४- | प्रयागका माहात्म्य, मार्कण्डेय-युधिष्ठिर-संवाद, प्रयागमें संगम-स्नानका फल ............. | २०२ | ४२- | महः आदि सात लोकों तथा सात पातालोंका और वहाँके निवासियोंका वर्णन, वैष्णवी तथा शाम्भवी शक्तियोंका वर्णन ............ | २२४ |
| ३५- | प्रयाग-माहात्म्य, प्रयागके विभिन्न तीर्थोंकी महिमा, त्रिपथगा गङ्गाका माहात्म्य, गङ्गास्नानका फल ............................ | २०६ | ४३- | सात महाद्वीपों और सात महासागरोंका परिमाण, जम्बूद्वीप तथा मेरुपर्वतकी स्थिति, भारत तथा किंपुरुष आदि वर्षोंका वर्णन, वर्षपर्वतोंकी स्थिति, जम्बूद्वीपके नाम पड़नेका कारण, जम्बूद्वीपके नदी एवं पर्वतोंका और वहाँके निवासियोंका वर्णन ............................ | २२६ |
| ३६- | प्रयाग-माहात्म्य, माघमासमें संगमस्नानका फल, त्रिमाघीकी महिमा, प्रयागमें प्राण-त्याग करनेका फल ............................ | २०९ | ४४- | ब्रह्मा, शंकर, इन्द्र, अग्नि, वरुण आदि देवताओंकी पुरियोंका तथा वहाँके निवासियोंका वर्णन, गङ्गाकी चार धाराओं और आठ मर्यादापर्वतोंका वर्णन ........................... | २२९ |
| ३७- | प्रयाग-माहात्म्य, यमुनाकी महिमा, यमुनाके तटवर्ती तीर्थोंका वर्णन, गङ्गामें सभी तीर्थोंकी स्थिति, मार्कण्डेय-युधिष्ठिर-संवादकी समाप्ति................................ | २१० | ४५- | केतुमाल, भद्राश्व, रम्यकवर्ष तथा वहाँके निवासियोंका वर्णन, हरिवर्षमें स्थित विष्णुके विमानका वर्णन, जम्बूद्वीपके वर्णनमें भारत-वर्षके कुलपर्वतों, महानदियों, जनपदों और वहाँके निवासियोंका वर्णन, भारतवर्षमें चार युगोंकी स्थितिका प्रतिपादन ................ | २३२ |
| ३८- | भुवनकोश-वर्णनमें राजा प्रियव्रतके वंशका वर्णन, प्रियव्रतके पुत्र राजा अग्नीध्रके वंशका वर्णन, जम्बू आदि सात द्वीपोंका तथा वर्षोंका वर्णन, जम्बूद्वीपके नौ वर्षोंमें राजा अग्नीध्रके नाभि, किंपुरुष आदि नौ पुत्रोंका आधिपत्य.... | २१२ | ४६- | विभिन्न पर्वतोंपर स्थित देवताओंके पुरोंका वर्णन तथा वहाँके निवासियों, नदियों, सरोवरों और भवनोंका वर्णन, जम्बूद्वीपके वर्णनका उपसंहार ........................................ | २३५ |
| ३९- | ‘भू’ आदि सात लोकोंका वर्णन, ग्रह-नक्षत्रोंकी स्थितिका वर्णन तथा उनका परिमाप, सूर्यरथका वर्णन, पूर्व आदि दिशाओंमें स्थित इन्द्रादि देवोंकी अमरावती आदि पुरियोंका नाम-निर्देश, सूर्यकी महिमा..... | २१५ | ४७- | प्लक्ष आदि महाद्वीपों, वहाँके पर्वतों, नदियों तथा निवासियोंका वर्णन, श्वेतद्वीपमें स्थित नारायणपुरका वर्णन, वहाँ वैकुण्ठमें रहनेवाले लक्ष्मीपति शेषशायी नारायणकी महिमाका ख्यापन ............................................ | २४० |
| ४०- | सूर्य-रथ तथा द्वादश आदित्योंके नाम, सूर्य-रथके अधिष्ठातृ देवता आदिका वर्णन, सूर्यकी महिमा ................................... | २१९ | |||
| ४१- | सूर्यकी प्रधान सात रश्मियोंके नाम, इनके द्वारा ग्रहोंका आप्यायन, सूर्यकी अन्य हजारों |