माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । (९९) यमलाके लक्षण । चिरेण यमलैर्वेगैर्या हिक्का संप्रवर्त्तते । कंपयन्ती शिरो ग्रीवां यमलां तां विनिर्दिशेत् ॥ ७ ॥ ठहर ठहरके दो दो हिचकी चले, शिर कन्धाको कंपावे वह यमला हिचकी जाननी॥ क्षुद्राके लक्षण । प्रकृष्टकालैर्या वेगैर्मन्दैः समभिवर्त्तते । नाभिप्रवृत्ता या हिक्का जत्रुमूलात्प्रधावति ॥ ८ ॥ जो हिचकी बहुत देरमें कण्ठ हृदयकी सन्धिस मन्द मन्द चले उसको क्षुद्रा नाम हिचकी कहते हैं ॥ गंभीराके लक्षण । नाभिप्रवृत्ता या हिक्का घोरा गम्भीरनादिनी । अनेकोपद्रववती गम्भीरा नाम सा स्मृता ॥ ९ ॥ जो हिचकी नाभिके पाससे उठ घोर गम्भीर शब्द करे और जिसमें प्यास ज्वरादि अनेक उपद्रव हों उसको गम्भीरा हिचकी कहते हैं ॥ महती हिचकीके लक्षण । मर्माप्युत्पीडयन्तीव सततं या प्रवर्तते । महाहिक्केति सा ज्ञेया सर्वगात्रप्रकम्पिनी ॥ १० ॥ जो हिचकी मर्मस्थानमें पीडा करती हुई और सर्व गात्रोंको कम्पावती हुई सब कालमें प्रवृत्त होय उसको महाहिक्का कहते हैं ॥ हिचकीके असाध्य लक्षण । आयम्यते हिक्कतो यस्य देहो दृष्टिश्चोर्ध्वं ताम्यते यस्य नित्यम्। क्षीणोऽन्नद्विट् क्षौति यश्चातिमात्रं तौ द्वौ चान्त्यौ वर्जयेद्धिक्कमानौ ॥ ११ ॥ जिसका हिचकीसे देह तन जावे, ऊंची दृष्टि हो जावे और मोह होय, क्षीण पड , जाय, भोजनमें अरुचि हो और छींक बहुत आवें इन दोनों हिचकियोंवाले रोगी अर्थात् जिसको गम्भीरा और महती हिचकी होंय, सो वैद्यको त्याज्य है ॥ अतिसञ्चितदोषस्य भक्तच्छेदकृशस्य च । व्याधिभिः क्षीणदेहस्य वृद्धस्यातिव्यवायिनः ॥ आसां या सा समुत्पन्ना हिक्का हन्त्याशु जीवितम् ॥ १२ ॥