भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( १३२ ) माधवनिदान । असुरपीडितके लक्षण । संस्वेदी द्विजगुरुदेवदोषवक्ता जिह्माक्षो विगतभयो विमार्ग- दृष्टिः । सन्तुष्टो न भवति चान्नपानजातैर्दुष्टात्मा भवति स देवशत्रुजुष्टः ॥ १९ ॥ पसीनायुक्त देह, ब्राह्मण, गुरु और देव इनमें दोषारोपण करनेवाला, टेढ़ी दृष्टिसे देखनेवाला, निर्भय, वेदविरुद्ध मार्गका चलनेवाला और बहुत अन्न जलसे भी जिसको सन्तोष न होय और दुष्टबुद्धि ऐसा मनुष्य दैत्यग्रहपीडित जानना ॥ गन्धर्वग्रहजके लक्षण । तुष्टात्मा पुलिनवनान्तरोपसेवी स्वाचारः प्रियपरिगीतगन्ध- माल्यः । नृत्यन्वै प्रहसति चारु चाल्पशब्दं गन्धर्वग्रहपरि- पीडितो मनुष्यः ॥ २० ॥ गन्धर्व ग्रहसे पीडित मनुष्य प्रसन्नचित्त, पुलिन और बाग बगीचेमें रहनेवाला अनिन्दित आचारको करनेवाला, गान सुगन्ध और पुष्प ये जिसको प्यारे लगे वह पुरुष नाचे, हंसे, सुन्दर बोले, थोडा बोले ॥ यक्षग्रहजके लक्षण । ताम्राक्षः प्रियतनुरक्तवस्त्रधारी गम्भीरो द्रुतगतिरल्पवाक् सहिष्णुः । तेजस्वी वदति च किं ददामि कस्मै यो यक्षग्रह- परिपीडितो मनुष्यः ॥ २१ ॥ यक्षग्रहसे पीडित मनुष्यके नेत्र लाल हों, सुन्दर बारीक ऐसे रक्तवस्त्रका धारण करनेवाला, गम्भीर, बुद्धिमान्, जल्दी चलनेवाला, प्रमाणका बोलनेवाला, सहन- शील, तेजस्वी, किसको क्या देऊं ऐसे बोलनेवाला ऐसा होय ॥ पितृग्रहजके लक्षण । प्रेतानां स दिशति संस्तरेषु पिण्डान् भ्रान्तात्मा जलमपि चापसव्यहस्तः । मांसेप्सुस्तिलगुडपायसाभिकामस्तद्भक्तो भवति पितृग्रहाभिजुष्टः ॥ २२ ॥ कुशाके ऊपर प्रेतोंको (पितरोंको) पिंड दे, चित्तमें भ्रांति रहे और उत्तरीयवस्त्र अपसव्य करके तर्पण भी करे, मांस खानेकी इच्छा होय, तथा तिल, गुड खीर इनपर मन चले । इस कहनेका प्रयोजन यह है कि जिसकी जिस पदार्थपर इच्छा