भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( १७६ ) माधवनिदान । विशेषणोंसे स्पष्ट प्रतीति होय है, क्यों कि गर्भ तो निरंतर प्रत्येक अवयवके साथ शूलरहित फडकता है, और रक्तगुल्मके इससे विपरीत लक्षण हैं फिर दश महीने व्यतीत होनेपर चिकित्सा करनी चाहिये यह क्यों कहा ? उत्तर-इसका कारण इस प्रकार है कि, इस रोगमें जब दश महीने व्यतीत होजायँ तब चिकित्सा करे वो सुखसाध्य होय है, कुछ प्रसवके नियमसे नहीं कहा, क्योंकि प्रसव ग्यारह बारह महीनेमें भी होय है सो चरकमें भी लिखा है-“ तं स्त्री प्रसूते सुचिरेण गर्भ स्पष्टो यदा वर्षगणैरपि स्यात् ” जैसे जीर्ण ज्वर होनेपर दूध पीना और दस्तका लेना हितकारक होय है। इससे ग्रन्थान्तरोंमें भी लिखा है- “ज्वरे तुल्यर्तुदोषत्वं प्रमेहे तुल्यदूष्यता । रक्तगुल्मे पुराणत्वं सुखसाध्यस्य लक्षणम् ॥ ” इस रक्तगुल्मको दश महीने व्यतीत होनेपर पुरानपना होय है और जैज्जटने भी कहा है कि दश महीनेके पहिले मर्दनादि क्रिया करनेसे गर्भाशयके विकार होय हैं। क्योंकि, रुधिर उस ठिकानेपर जमा होय है और ग्यारहवें महीनेमें गुल्मका गोला बहुत अच्छा जम जाता है इसीसे ग्यारहवे महीनेमें स्नेहादिकरके सब शरीर मृदु (नरम) करनेसे मर्दन करे तो गर्भाशय भले प्रकार अच्छा रहे ॥ अब कहते हैं कि, बहुत दिनका गुल्मरोग ऐसी अवस्था होनेपर असाध्य हो जाय है उसको कहते हैं- सञ्चितः क्रमशो गुल्मो महावास्तुपरिग्रहः । कृतमूलः शिरानद्धो यदा कूर्म इवोन्नतः ॥ १७॥ दौर्बल्यारुचिहृल्लासकासच्छर्द्यरति- ज्वरैः । तृष्णातन्द्राप्रतिश्यायैर्युज्यते न स सिध्यति ॥ १८ ॥ क्रमक्रमसे बढा गुल्म जब जब उदर (पेट)में फैलजाय और धातुओंमें उसका मूल जाय पहुँचे तथा उसपर नाडियोंका जाल लिपटजाय और कछुएकी पीठके समान गुल्म ऊंचा होय, तब इस रोगीके निःसत्त्वपना, अरुचि, सूखी रह, खांसी, वमन, अरति और ज्वर तथा प्यास, तन्द्रा और पीनस ये लक्षण होयं ऐसा रोगी असाध्य है ॥ असाध्य लक्षण । गृहीत्वा सज्ज्वरः श्वासहृच्छर्द्यतीसारपीडितम् । हृन्नाभिहस्तपादेषु शोथः क्षिपति गुल्मिनम् ॥ १९ ॥ श्वासः शूलं पिपासाऽन्नविद्वेषो ग्रन्थिमूढता । जायते दुर्बलत्वं च गुल्मिनां मरणाय वै ॥ २० ॥ वमन और अतिसार इनसे पीडित ऐसे गुल्मरोगीके हृदय, नाभी, हाथ, पैर इन ठिकाने सूजन होय और ज्वर, दमा जिसके होयं ऐसे लक्षण होनेसे रोगी