भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( २११ ) अथान्डवृद्धिनिदानम् । ━◇❖◇━ अण्डवृद्धिकी सम्प्राप्ति । क्रुद्धोऽनूर्ध्वगतिर्वायुः शोथशूलकरश्चरन् । मुष्कौ वंक्षणतः प्राप्य फलकोशाभिवाहिनीः ॥ प्रपीड्य धमनीर्वृद्धिं करोति फलकोशयोः ॥ १ ॥ कुपित भई अधोगमनशील ( नीचे विचरनेवाली ) तथा सूजन और शूल उत्पन्न करनेवाली वायु संचार करती हुई वंक्षण ( लिंग और जंघोंकी सन्धि ) से अण्ड- कोशोंमें आय कर अण्ड और कोश अथवा अण्डोंके कोशोंके बहनेवाली धमनियोंको दुष्ट कर अण्डकोशकी ( दोनों अंडोंकी अथवा एक ओरके अण्डकी ) वृद्धि करै है॥ दोषास्रमेदोमूत्रान्त्रैः स वृद्धिः सप्तधा गदः । मूत्रान्त्रजावप्यनिलाद्धेतुभेदस्तुं केवलम् ॥ २ ॥ वह वृद्धिरोग तीनों दोषोंसे ३, रुधिरसे १, मेदसे १, मूत्रसे १ और आंतोंसे १ ऐसे सात प्रकारका है। मूत्रज और अन्त्रजवृद्धि ये दोनों वायुसे होती हैं, परन्तु इन दोनोंका निदान चिकित्सा में भेद होनेसे पृथक् ग्रहण करा है। सो लिखा भी है— “ मूत्रान्त्रजावप्यनिलाद्धेतुभेदस्तु केवलम् ” इति ॥ वातकी अण्डवृद्धिके लक्षण । वातपूर्णादृतिस्पर्शो रूक्षो वातादहेतुरुक् ॥ ३ ॥ वातसे भरी मसक जैसी हाथके लगनेसे मालूम होय ऐसा मालूम होय, रूक्ष और विना कारण दुखने लगे, वह वातकी अंडवृद्धि जाननी ॥ पित्तकी अंडवृद्धिके लक्षण । पक्कोदुम्बरसंकाशः पित्ताद्दाहोष्मपाकवान् । पित्तकी अंडवृद्धि पके गूलरके समान होय है तथा दाह और गरमी तथा पक- नेवाली होय है ॥ कफकी अंडवृद्धिके लक्षण । कफाच्छीतो गुरुः स्निग्धः कण्डूमान्कठिनोऽल्परुक् ॥ ४ ॥ ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ १ क्योंकि कहा भी है—दोषदूष्यसंसर्गादायतनविशेषात् निमित्ततश्चैषां व्याधीनां भेदः ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA