माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 245, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( २२७ ) शोषश्चोषो विवर्णः स्यादंगुल्येवावपाट्यते । आसने शयने स्थाने शांतिं वृश्चिकविद्धवत् ॥ ७ ॥ न गच्छेदाततः शोथो भवेदाध्मातवस्तिवत् । ज्वरस्तृष्णाऽरुचिश्चैव पच्यमानस्य लक्षणम् ॥ ८ ॥ जिस समय व्रण पकनेको होय उस समय ये लक्षण होते हैं-फोडेके स्थानमें अग्निसे जलेहुएके समान जलन होय, खार लगानेकासा चिनमिनावे, चेंटी काटनेकीसी पीडा होय, वह दो टूक करनेके समान तथा शस्त्रसे फाडनेके समान, दण्ड आदिके मारनेके समान तथा हाथसे मीडनेके समान तथा भीतर सूईसे छेदनेके समान पीडा और उसमें अत्यन्त दाह होय, अग्निसे सेकनेके समान उसमें वेदना होय, उस फोडेका रंग बदल जाय, उंगलीके लगानेसे उखारनेकीसी पीडा होय, बैठनेमें सोनेमें खडे रहनेमें वीछू काटनेकीसी घोर पीडा होय, वो पीडा कभी शांत नहीं होय, वो सूजन फूली हुई बस्ती ( मूत्रस्थान ) के सदृश तनीसी होय, उसमें ज्वर, प्यास, अरुचि ये लक्षण होते हैं ॥ पक्वव्रणके लक्षण । वेदनोपशमः शोथो लोहितोऽल्पो न चोन्नतः । प्रादुर्भावो वलीनां च तोदः कण्डूर्मुहुर्मुहुः ॥ ९ ॥ उपद्रवाणां प्रशमो निम्नता स्फुटनं त्वचाम् । बस्ताविवाम्बुसंचारः स्याच्छोथेऽङ्गुलिपीडिते ॥ १० ॥ पूयस्य पीडयत्येकमन्तमन्ते च पीडिते । भक्ताकांक्षा भवेच्चैव शोथानां पक्वलक्षणम् ॥ ११ ॥ व्रण पकनेसे पीडा शांत हो जाय, उसकी सूजन तांबेके रंगकी होय और थोडी होय, ऊंची न होय, उसमें गुलझट पडे, सुई चुभानेकीसी पीडा होय, बारंबार खुजली चले, पित्तके कोपसे दाहादि उपद्रवोंकी शांति हो, स्वभावसे ही व्रणकी जगह गढेला होजाय, त्वचायें फटजाँय, सूजन, अंगुलिसे दबानेसे जैसे बस्तिमें पानी इधर उधर होय उसी प्रकार शोथमें राध इधर उधर होय, व्रणके अन्त अवयवके दबाने- पर राध एक देशको पीडित करती है अर्थात राध एक जगहसे निकलने लगती है, अन्नमें इच्छा हो ये पक्वव्रणके लक्षण हैं ॥
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