माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २४० ) माधवनिदान । कमरकी कपाल हड्डी टूटगई हो अथवा संधिके पासकी हड्डी हटगई हो अथवा स्थानसे छूटगई हो, जंघाकी हड्डीका चूर होगया हो ऐसे रोगीको वैद्य त्याग दे ॥ असंश्लिष्टकपालं च ललाटे चूर्णितं च यत् । भग्नं स्तनान्तरे पृष्ठे शंखे मूर्ध्नि च वर्जयेत् ॥ ९ ॥ ललाटकी हड्डी टुकडे टुकडे हो परस्पर दूर हो जाय, जुडनेके कामके न रहे, अथवा स्तनके बीचकी अथवा पीठकी अथवा शंख (कनपटी) की हड्डी, मस्तककी हड्डी टूट गई हो उसको वैद्य त्याग दे ॥ सावधानता न करनस असाध्यता दिखाते हैं- सम्यक्संधितमप्यस्थि दुर्निक्षेपनिबंधनात् । संक्षोभाद्वापि यद्गच्छेत्क्रियां तच्च वर्जयेत् ॥ १० ॥ हड्डी भली प्रकार जुड भी गई हो उसको अच्छी रीतिसे न राखे अथवा अच्छी रीतिसे बांधे नहीं, उसमें किसीका धक्का लगनेसे फिर जैसेका तैसा हो जाता है और यह साध्य नहीं होय इसको वैद्य त्याग दे ॥ अस्थिविशेष करके भग्नविशेष कहते हैं- तरुणास्थीनि नम्यन्ते भिद्यन्ते नलकानि च । कपालानि विभज्यन्ते स्फुटन्ति रुचकानि च ॥ ११ ॥ तरुण हड्डी नम जाती है या टेढी हो जाती है, नलक हड्डी चिर जाती है। कपालास्थि फूट टूक कर टूक हो जाय, रुचकास्थि (दन्तादिक) हड्डी टुकडा होकर गिरपडे ॥ इति श्रीपंडितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां भग्ननिदानं समाप्तम् ॥ १ सुश्रुते-जानुनितंबांसगण्डतालुशंखवंक्षणशिरःसु कपालानीति ।