भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 313, कुल 404 में से

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भाषाटीकासमेत । (२९५) हनुमोक्षके लक्षण । वातेन तैस्तैर्भावैस्तु हनुसंधिर्विसंहतः । हनुमोक्ष इति ज्ञेयो व्याधिरर्दितलक्षणः ॥ ३२ ॥ बादीके योगसे तिस तिस अभिघातादिक करके हनुसन्धि (ठोडी) में चोट लगनेसे दांत चलायमान हो जायँ उसको हनुमोक्ष कहते हैं, इसके लक्षण अर्दित- रोग जो वातव्याधिमें कहि आये हैं उस प्रकारके होयँ । सुश्रुतने इस रोगको दाँतोंके समीप होनेसे दन्तरोग कहा है, परन्तु संग्रहकारने मुख्य दन्तरोग न होनेसे नहीं लिखा । इसको संग्रहकारने भोजके कहे अनुसार वातव्याधिमें लिखा है इसीसे हनुमोक्ष रोगका पाठ किसी पुस्तकमैं लिखा है और किसीमें नहीं लिखा ॥ जिह्वागत ५ रोग । वातजके लक्षण । जिह्वाऽनिलेन स्फुटिता प्रसुप्ता भवेच्च शाकच्छदनप्रकाशा । बादीसे जीभ फटीसी, प्रसुप्त (रसका ज्ञान जाता रहै) और शाकवान् वृक्षके पत्र समान कांटेयुक्त खरदरी हो ॥ पित्तजके लक्षण । पित्तेन पीता परिदह्यते च दीर्घैः सरक्तैरपि कण्टकैश्च ॥ ३३ ॥ पित्तसे जीभ पीली हो, उसमें दाह हो उसमें लम्बे तांबेके समान कांटे होयँ इस रोगको लौकिकमें जाली कहते हैं अथवा जोडी कहते हैं ॥ कफजके लक्षण । कफेन गुर्वी बहुलाचिता च मांसोच्छ्रयैः शाल्मलिकण्टकाभैः॥३४॥ कफसे जीभ मोटी भारी होय है और उसमें सेमरके कांटेके समान मांसके अंकुर होयँ ॥ अलासके लक्षण । जिह्वातले यः श्वयथुः प्रगाढः सोऽलाससंज्ञः कफरक्तमूर्तिः । जिह्वां स तु स्तंभयति प्रवृद्धो मूले च जिह्वा भृशमेति पाकम्॥३५॥ जीभके नीचे कफ रुधिरसे प्रगट ऐसी भयंकर सूजन होय उसको अलास कहते हैं, उसके बढनेसे स्तंभ होय तथा जीभके मूलमें अत्यन्त पाक होता है, यह रोग असाध्य है ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA

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