माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 327, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ३०९ ) चिकित्साभेदार्थ पीनसके आमपक्वके लक्षण । शिरोगुरुत्वमरुचिर्नासास्रावस्तनुः स्वरः। क्षामः ष्ठीवेत्तथाऽभीक्ष्णमामपीनसलक्षणम् ॥ ११ ॥ आमलिंगान्वितः श्लेष्मा घनश्चाप्सु निमज्जति । स्वरवर्णविशुद्धिश्च पक्वपीनसलक्षणम् ॥ १२ ॥ शिरमें भारीपन, अन्नमें अरुचि, नासिकासे गरम गरम जलका झरना आवाज कुछ मन्दी हो और शरीरका कृश होना, बारवार थूकना, यह आम (कच्चे) पीनसके लक्षण हैं और जिसमें इसी पूर्वोक्त आम पीनसके भी लक्षण हों और कफ गाढा हो गया हो और जलमें गेरनेसे डूबजाय और मुखसे साफ आवाज निकले और मुखका रंग ( रूहानी ) अच्छा होय तो जानना कि, यह पीनस पक गया है ॥ प्रतिश्यायकी संप्राप्ति । सन्धारणाजीर्णरजोऽतिभाष्यक्रोधर्तुवैषम्यशिरोभितापैः । प्रजागरातिस्वपनाम्बुशीतावश्यायतो मैथुनबाष्पधूमैः ॥ १३ ॥ संस्त्यानदोषे शिरसि प्रवृद्धो वायुः प्रतिश्यायमुदीरयेच्च ॥ १४ ॥ वेगोंके रोकनेसे, अजीर्ण कारक पदार्थोंके खानेसे, रज ( धूल ) के नासिकाके भीतर जानेसे, अत्यन्त भाषण ( अत्यन्त पढने ) से और अत्यन्त गुस्सा करनेसे तथा ऋतुविपर्यय अर्थात् एक ऋतुमें दूसरे ऋतुके लक्षण होनेसे, शिरोभिताप अर्थात् ग्रीष्म ऋतुमें शिरसे अत्यन्त धूप सेवन करनेसे, रात्रिमें जागनेसे, दिनमें विशेष सोनेसे और शीत पदार्थोंके अधिक सेवन करनेसे इसी तरह कोहरके खानेसे अत्यन्त मैथुन करनेसे, पसीना अथवा आसुओंके रुकनेसे अथवा नासिकामें धूआँ रुकनेसे शिरमें दोष इकट्ठे हों फिर वायु वृद्धिगत होकर प्रतिश्याय रोग ( जुकाम ) उत्पन्न करे ये कारण सद्योजनक अर्थात् तत्काल पीनस करनेवाले हैं ॥ चयादिक्रमसे इसका दूसरा निदान । चयं गता मूर्द्धनि मारुतादयः पृथक्समस्ताश्च तथैव शोणितम् । प्रकुप्यमाना विविधैः प्रकोपनैस्ततः प्रतिश्यायकरा भवंति ॥ १५ ॥ मस्तकमें पृथक् वातादि दोष तथा सर्व दोष उसी प्रकार रुधिर संचय होकर अनेक प्रकारके कारणों ( बलवानसे वैर करना दिवास्वापादि ) से कुपित होकर प्रतिश्याय उत्पन्न करें ॥
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