माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 341, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ३२३ ) तीसरे पटलगत काच ( मोतियाबिन्दु की ) उपेक्षा करनेसे वही फिर चौथे पटलमें पहुँचता है, तब उसे लिंगनाश और नीलिका कहते हैं, यह रोग असाध्य है, सो निमि'आचार्य लिखते हैं, परन्तु गदाधर आचार्य कहते हैं कि, विशेष काचको नीलिकाकाच कहते हैं ॥ दोषविशेषकरके रूपका दीखना कैसा होता है ? तत्र वातेन रूपाणि भ्रमन्तीव हि पश्यति । आविलान्यरुणाभानि व्याविद्धानीव मानवः ॥ ४४ ॥ पित्तेनादित्यखद्योतशक्रचापत्तडिद्रुणान् । नृत्यतश्चैव शिखिनः सर्वं नीलं च पश्यति ॥ ४५ ॥ कफेन पश्येद्रूपाणि स्निग्धानि च सितानि च । सलिलप्लावितानीव परिजाड्यानि मानवः ॥ ४६ ॥ पश्येद्रक्तेन रक्तानि तमांसि विविधानि च । ससितान्यथ कृष्णानि पीतान्यपि च मानवः ॥ ४७ ॥ सन्निपातेन चित्राणि विप्लुतानि च पश्यति । बहुधा च द्विधा वापि सर्वाण्येव समंततः ॥ हीनांगान्यधिकांगानि ज्योतींष्यपि च पश्यति ॥ ४८ ॥ बादीसे रोगीको मलीन, कुछ लाल, तिरछी और भ्रमती ऐसी वस्तु दीखे । पित्तसे सूर्य, खद्योत ( पटबीजना ) इन्द्रधनुष, बिजली इनको और नाचनेवाले मोर तथा सर्व वस्तु नीली दीखे। कफसे चिकना और सफेद तथा पानीमें डुबोया हुआ निकालनेके समान और भारी ऐसा रूप दीखे । रुधिरसे लाल और अनेकप्रकारका अन्धकार तथा किंचित् सफेद काली और पीली ऐसी वस्तु दीखे । सन्निपातसे अनेक प्रकारके विपरीत अर्थात एककी अनेक तथा दो अथवा अनेक प्रकारके रूप दीखें, हीन अंगके अथवा अधिक अंगके रूप रोगी देखे और ज्योतिस्वरूपसे सब पदार्थ दीखे॥ पित्तसे दूसरा परिम्लायिसंज्ञक तिमिर होय है । पित्तं कुर्यात्परम्लायि मूर्च्छितं रक्ततेजसा । पीता दिशस्तथोद्द्योतान्नवीनपि स पश्यति । विकीर्यमाणान्खद्योतैवॄक्षांस्तेजोभिरेव च ॥ ४९ ॥ १ काच इत्येष किजयो याप्यस्त्रिपटलस्यितैः । चतुर्थपटलं प्राप्तो लिङ्गनाशः सः उच्यते ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA