भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( ३२६ ) दृष्टिरागो भवेच्चित्रो लिंगनाशे त्रिदोषजे । यथास्वं दोषलिङ्गानि सर्वेष्वेव भवंति हि ॥ ५६ ॥ वादीसे दृष्टिमण्डल लाल, चञ्चल और खरदरा होता है । पित्तसे दृष्टिमण्डल किञ्चित् नीला तथा काँसेके समान पीला होवे । कफसे भारी चिकना शंख कुन्द- फूल और चन्द्र इनके समान सफेद होय और उसके नेत्रमें हलनेवाली कमलपत्रके ऊपर पानीकी बूँदके समान टेढी तिरछी सफेद बून्द फैलीसी दिखलाई दे । रुधिरसे दृष्टिमण्डल मूंगाके समान अथवा लाल कमलके समान लाल होवे और त्रिदोषज लिंगनाशमें तरह तरहके मण्डल होयँ तथा सर्व दोषोंके लिंगमण्डलमें वातादि दोषोंके न्यारे २ लक्षण होयँ ॥ आगे कहेगये और पीछे कहे ऐसे दृष्टिरोगोंकी संख्या । षड्लिङ्गनाशाः षडिमे च रोगा दृष्ट्याश्रयाः षट् च षडेव च स्युः ५७ पूर्व कहे लिंगनाश रोग छः और आगे विदग्धदृष्ट्यादि कहे गये वे छः ऐसे मिल- कर बारह दृष्टिरोग होते हैं ॥ पित्तविदग्धके लक्षण । पित्तेन दुष्टेन गतेन वृद्धिं पीता भवेद्यस्य नरस्य दृष्टिः । पीतानि रूपाणि च तेन पश्येत्स वै नरः पित्तविदग्धदृष्टिः ॥ ५८ ॥ पित्त दुष्ट होकर बढनेसे जिस मनुष्यकी दृष्टि पीली होय तथा उसके योगसे उस मनुष्यको सब पदार्थ पीले रंगके दीखें, उस दृष्टिको पित्तविदग्ध कहते हैं ॥ दिवांध्यके लक्षण । प्राप्ते तृतीयं पटलं च दोषे दिवा न पश्येन्निशि वीक्षते सः । रात्रौ स शीतानुगृहीतदृष्टिः पित्ताल्पभावादपि तानि पश्येत् ॥ ५९ ॥ तीसरे पटलमें दोष ( पित्त ) जानेसे दिनमें रोगीको नहीं दीखे, रात्रिमें शीतल- ताके कारण पित्त कम होनेसे दीखे ॥ कफविदग्धदृष्टिके लक्षण । तथा नरः श्लेष्मविदग्धदृष्टिस्तान्येव शुक्लानि हि मन्यते तु । इसी प्रकार कफविदग्ध पुरुषको सफेद रूप दीखे ॥ नक्तांध्य ( रतौंध ) के लक्षण । त्रिषु स्थितो यः पटलेषु दोषो नक्तांध्यमापादयति प्रसय । दिवा स सूर्यानुगृहीतदृष्टिः पश्येत्तु रूपाणि कफाल्पभावात् ॥ ६० ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA