भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 358, कुल 404 में से

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पृष्ठ 358

( ३४० ) माधवनिदान । श्लैष्मिकके लक्षण । आमं सपिच्छप्रतिमं सपांडु पुलाकतोयप्रतिमं कफात् । कफसे आमरस ( कच्चा रस ) संयुक्त, चिकना, किंचित् पीला, मांसके धुले जलके समान स्राव होय, इसको श्वेत प्रदर अथवा सोमरोग कहते हैं ॥ पैत्तिकके लक्षण । सपीतनीलासितरक्तमुष्णं पित्तार्त्तियुक्तं भृशवेगि पित्तात् ॥ ४ ॥ किंचित् पीला, नीला, काला, लाल, गरम ऐसा प्रदर बहै, उसमें पित्तसे दाह चिमचिमादि पीडा होय तथा उसका वेग अत्यन्त होय ॥ वातिकके लक्षण । रूक्षारुणं फेनिलमल्पमल्पं वातार्त्ति वातात्पिशितोदकाभम् । वातसे रूक्ष, लाल, झागसे युक्त मांसके और सफेद पानीके समान थोडा थोडा प्रदर बहै उसमें बादी ( आक्षेपादि ) की पीडा होय है ॥ त्रिदोषजके लक्षण । सक्षौद्रसर्पिर्हरितालवर्णं मज्जाप्रकाशं कुणपं त्रिदोषम् । तच्चाप्यसाध्यं प्रवदन्ति तज्ज्ञा न तत्र कुर्वीत भिषक् चिकित्साम्॥५॥ जो प्रदर शहद, घृत, हरिताल इनके रंगके समान, चर्बीके समान तथा मुर्दे- कीसी दुर्गंध युक्त होय उसको त्रिदोषप्रदर जानना, यह असाध्य है अर्थात् इसकी वैद्य चिकित्सा न करे ॥ विशुद्धार्त्तवके लक्षण । मासान्निपिच्छदाहार्त्ति पञ्चरात्रानुबन्धि च । नैवातिबहुलं नाल्पमार्त्तवं शुद्धमादिशेत् ॥ ६ ॥ शशासृक्प्रतिमं यच्च यद्वा लाक्षारसोपमम् । तदार्त्तवं प्रशंसन्ति यच्चाप्सु न विरज्यते ॥ ७ ॥ जो आर्त्तव ( रजोधर्शनका रुधिर ) चिकना नहीं होवे तथा जिसमें दाह झूला- दिक न हों, तथा जिसका अनुबन्ध महीनेमें पांच दिवसपर्यन्त होय तथा बहुत न निकले और थोडा भी न होय ( मध्यम प्रमाणका होय ) उसको शुद्ध आर्त्तव जानना चाहिये और जो आर्त्तव खरगोशके रुधिरके समान होवे अथवा लाखके रंगकासा लाल होवे और जिससे रंगे कपडेको जलमें डालनेसे वर्ण नहीं पलटे, उसको शुद्ध आर्त्तव कहते हैं ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां प्रदररोगनिदानं समाप्तम् ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA