भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 1118

व्यसनं ह्येव धर्मस्य धर्मिणामापदुच्यते ॥ १४ ॥ ‘जो आपत्तिकालमें धर्मको धारण करता है, वही धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ है। धर्मपालनमें संकट उपस्थित होना ही धर्मात्मा पुरुषोंके लिये आपत्ति कही जाती है॥ १४ ॥

पुण्यं प्राणान् धारयति पुण्यं प्राणदमुच्यते । येन येनाचरेद् धर्मं तस्मिन् गर्हा न विद्यते ॥ १५ ॥ ‘पुण्य ही प्राणोंको धारण करता है, इसलिये पुण्य प्राणदाता कहलाता है; अतः जिस-जिस उपायसे धर्मका आचरण हो सके, उसके करनेमें कोई निन्दाकी बात नहीं है॥ १५ ॥

(महतोऽत्र स्त्रियं कामाद् बाधितां त्राहि मामपि । धर्मार्थकाममोक्षेषु दयां कुर्वन्ति साधवः ॥ तं तु धर्ममिति प्राहुर्मुनयो धर्मवत्सलाः । दिव्यज्ञानेन पश्यामि अतीतानागतानहम् ॥ तस्माद् वक्ष्यामि वः श्रेय आसन्नं सर उत्तमम् । अद्यासाद्य सरः स्नात्वा विश्रम्य च वनस्पतौ ॥ व्यासं कमलपत्राक्षं दृष्ट्वा शोकं विहास्यथ ॥ धार्तराष्ट्राद् विवासश्च दहनं वारणावते । त्राणं च विदुरात् तुभ्यं विदितं ज्ञानचक्षुषा ॥ आवासे शालिहोत्रस्य स च वासं विधास्यति । वर्षवातातपसहः अयं पुण्यो वनस्पतिः ॥ पीतमात्रे तु पानीये क्षुत्पिपासे विनश्यतः । तपसा शालिहोत्रेण सरो वृक्षश्च निर्मितः ॥ कादम्बाः सारसा हंसाः कुरर्यः कुररैः सह । रुवन्ति मधुरं गीतं गान्धर्वस्वनमिश्रितम् ॥

‘मैं महती कामवेदनासे पीड़ित एक नारी हूँ, अतः आप मेरी भी रक्षा कीजिये। साधु पुरुष धर्म, अर्थ, काम और मोक्षकी सिद्धिके सभी पुरुषार्थोंके लिये शरणागतोंपर दया करते हैं। धर्मानुरागी महर्षि दयाको ही श्रेष्ठ धर्म मानते हैं। मैं दिव्य ज्ञानसे भूत और भविष्यकी घटनाओंको देखती हूँ। अतः आपलोगोंके कल्याणकी बात बता रही हूँ। यहाँसे थोड़ी ही दूरपर एक उत्तम सरोवर है। आपलोग आज वहाँ जाकर उस सरोवरमें स्नान करके वृक्षके नीचे विश्राम करें। कुछ दिन बाद कमलनयन व्यासजीका दर्शन पाकर आपलोग शोकमुक्त हो जायेंगे। दुर्योधनके द्वारा आपलोगोंका हस्तिनापुरसे निकाला जाना, वारणावत नगरमें जलाया जाना और विदुरजीके प्रयत्नसे आप सब लोगोंकी रक्षा होनी आदि बातें उन्हें ज्ञानदृष्टिसे ज्ञात हो गयी हैं। वे महात्मा व्यास शालिहोत्र मुनिके आश्रममें निवास करेंगे। उनके आश्रमका वह पवित्र वृक्ष सर्दी, गर्मी और वर्षाको अच्छी तरह सहनेवाला है। वहाँ केवल जल पी लेनेसे भूख-प्यास दूर हो जाती है। शालिहोत्र मुनिने