महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपञ्चमोऽध्यायः
भृगुके आश्रमपर पुलोमा दानवका आगमन और उसकी अग्निदेवके साथ बातचीत
शौनक उवाच
पुराणमखिलं तात पिता तेऽधीतवान् पुरा । कच्चित् त्वमपि तत् सर्वमधीषे लोमहर्षणे ॥ १ ॥ **शौनकजीने कहा—**तात लोमहर्षणकुमार! पूर्वकालमें आपके पिताने सब पुराणोंका अध्ययन किया था। क्या आपने भी उन सबका अध्ययन किया है? ॥ १ ॥
पुराणे हि कथा दिव्या आदिवंशाश्च धीमताम् । कथ्यन्ते ये पुरास्माभिः श्रुतपूर्वाः पितुस्तव ॥ २ ॥ पुराणमें दिव्य कथाएँ वर्णित हैं। परम बुद्धिमान् राजर्षियों और ब्रह्मर्षियोंके आदिवंश भी बताये गये हैं। जिनको पहले हमने आपके पिताके मुखसे सुना है ॥ २ ॥
तत्र वंशमहं पूर्वं श्रोतुमिच्छामि भार्गवम् । कथयस्व कथामेतां कल्याः स्म श्रवणे तव ॥ ३ ॥ उनमेंसे प्रथम तो मैं भृगुवंशका ही वर्णन सुनना चाहता हूँ। अतः आप इसीसे सम्बन्ध रखनेवाली कथा कहिये। हम सब लोग आपकी कथा सुननेके लिये सर्वथा उद्यत हैं ॥ ३ ॥
सौतिरुवाच
यदधीतं पुरा सम्यग् द्विजश्रेष्ठैर्महात्मभिः । वैशम्पायनविप्राग्र्यैस्तैश्चापि कथितं यथा ॥ ४ ॥ **सूतपुत्र उग्रश्रवाने कहा—**भृगुनन्दन! वैशम्पायन आदि श्रेष्ठ ब्राह्मणों और महात्मा द्विजवरोंने पूर्वकालमें जो पुराण भलीभाँति पढ़ा था और उन विद्वानोंने जिस प्रकार पुराणका वर्णन किया है, वह सब मुझे ज्ञात है ॥ ४ ॥
यदधीतं च पित्रा मे सम्यक् चैव ततो मया । तावच्छृणुष्व यो देवैः सेन्द्रैः सर्षिमरुद्गणैः ॥ ५ ॥ पूजितः प्रवरो वंशो भार्गवो भृगुनन्दन । इमं वंशमहं पूर्वं भार्गवं ते महामुने ॥ ६ ॥ निगदामि यथा युक्तं पुराणाश्रयसंयुतम् । भृगुर्महर्षिर्भगवान् ब्रह्मणा वै स्वयम्भुवा ॥ ७ ॥ वरुणस्य क्रतौ जातः पावकादिति नः श्रुतम् । भृगोः सुदयितः पुत्रश्च्यवनो नाम भार्गवः ॥ ८ ॥